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इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
केशव कुमार, मुजफ्फरपुर । एसकेएमसीएच में इलाज की आस लेकर आने वाले मरीजों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहा हैं। आलम यह है कि पथरी से लेकर हर्निया और हिप फ्रैक्चर जैसे गंभीर रोगों के आपरेशन के लिए मरीजों को एक से दो महीने की लंबी वेटिंग दी जा रही है।
ठंड खत्म होते ही अस्पताल में मरीजों का ऐसा हुजूम उमड़ा है कि चिकित्सकों के हाथ-पांव फूलने लगे हैं। अस्पताल प्रशासन की मानें तो कड़ाके की ठंड के कारण बीते महीनों में सैकड़ों मरीजों ने अपनी सर्जरी टाल दी थी। अब मौसम सामान्य होते ही अस्पताल की ओपीडी में रोजाना हजारों की संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। यहां किडनी स्टोन, गाल ब्लैडर (पित्त की थैली), यूट्रस और हर्निया के आपरेशन के लिए लंबी कतार लगी है।
पिछले दिन दिनों में किडनी स्टोन के बीस, गाल ब्लैडर के तेरह, यूट्रस के बाइस और हर्निया के नौ मरीज इलाज को पहुंचे है। चिकित्सक सभी मरीजों का प्राथमिक उपचार के बाद ब्लड जांच, अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे कराने को कहा है। हालांकि इस बीच मरीज चिकित्सक से आपरेशन की तिथि पूछते हुए देखे गए है।
चिकित्सक उन्हें जांच के बाद एक-दो महीने प्रतीक्षा करने के बारे में बता रहे है। इधर, चिकित्सक डा. अजीत कुमार की माने तो पहले के ओपीडी में इलाज को पहुंचे मरीजों को आपरेशन के लिए भर्ती किया जा रहा है। उन सभी का आपरेशन के लिए अभी दो सप्ताह से अधिक का समय लग सकता है।
नए मरीजों के स्थिति के मुताबिक अभी रूकना पर सकता है। हालांकि डा. अजीत बताते है कि स्थिति के मेजर आपरेशन के लिए डेट दिया जा रहा है। गंभीर हालत वाले मरीजों को सामान्य ओटी वाले मरीजों के साथ टैग करके आपरेशन किया जा रहा है। सबसे बुरा हाल हड्डी विभाग का बताया जा रहा है। यहां छह महीनों से भर्ती मरीज का भी आपरेशन होना मुश्किल है।
हड्डी इंडोर वार्ड में अधिकांश मरीज एक महीने से अधिक समय से भर्ती है। हिप फ्रैक्चर जैसे मामलों में, जहां तत्काल सर्जरी की जरूरत होती है, वहां भी देरी से मरीजों की आपरेशन होने से मर्ज बढ़ने का खतरा बढ़ते जा रहा है। इधर, उपाधीक्षक डा. सतीश कुमार सिंह बताते है कि इन दिनों मरीजों की भीड़ बढ़ी है।
आपरेशन करने के पूर्व मरीजों की पूर्णत: जांच होता है। जांच रिपोट के आधार पर भर्ती होते है। इसके बाद नंबर आने पर आपरेशन जिस यूनिट में भर्ती है उस यूनिट के इंचार्ज के नेतृत्व में बनी टीम करनी है।
भीड़ को देखते हुए मरीजों को थोड़ा इंतजार करना पर रहा है। उन्होंने बताया कि यहां आम तौर पर सर्जरी में हर्निया, अपेंडिक्स, हड्डी विभाग में फ्रैक्चर, स्त्री रोग विभाग में सिजेरियन, हिस्टेरेक्टामी, नेत्र रोग विभाग में मोतियाबिंद, इएनटी विभाग में टान्सिल के अलावा पिडिया सर्जरी और न्यूरोसर्जरी किया जा रहा है।
यूनिट के फेर में फंस रही है आपरेशन
एसकेएमसीएच में आपरेशनों का बंटवारा यूनिट वार होता है। अस्पताल में निर्धारित यूनिट के अनुसार ही चिकित्सकों की टीम और आपरेशन थिएटर का समय तय है। सीमित संसाधन और चिकित्सकों की कमी के कारण एक दिन में गिने-चुने आपरेशन ही हो पा रहे हैं। ऐसे में जो मरीज आज भर्ती होने आ रहे हैं, उन्हें फरवरी लास्ट या मार्च की तारीख दी जा रही है। |
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