cy520520 • 2026-1-15 07:56:24 • views 835
कतकी मेले में उमड़ी भीड़
जागरण संवाददाता, लखनऊ। समयावधि बीतने के बाद भी गोमती तट पर कतकी मेले का संचालन हो रहा था। इसमें नगर निगम जोन तीन के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। इतने बड़े आयोजन से अधिकारी अनभिज्ञ कैसे बने रहे।
लगातार हो रही शिकायतों के बाद नगर आयुक्त गौरव कुमार ने बुधवार दोपहर को मेले के संचालन पर रोक लगाने का आदेश दिया और इसके बाद नगर निगम ने झूलेलाल वाटिका में चल रहे कतकी मेले के दो गेट पर ताला लगा दिया। हालांकि इस दौरान मेला परिसर में काफी भीड़ थी और वहां शाम तक लोग मेले का आनंद लेते दिखे।
कई लोग प्रवेश न मिलने पर नाराज दिखे। कायदे से तो नगर निगम को यह कार्रवाई रात के समय करनी थी, जिससे किसी को परेशानी न हो।
45 दिन के मेले की अवधि सात जनवरी को खत्म हो गई थी और चार दिन में सामान ले जाने का समय दिया गया था लेकिन सात जनवरी के बाद भी मेला संचालित हो रहा था, जबकि नगर निगम की तरफ से मेला का विस्तार करने की अनुमति नहीं दी थी और हर दिन नगर निगम को छह लाख का वित्तीय नुकसान हो रहा था।
छह दिन में 36 लाख की चपत लगाई गई है। मेले में एक हजार दुकानों के साथ झूले भी लगाए गए थे। हर दिन 15 से बीस हजार लोग मेला घूमने पहुंच रहे थे और पार्किंग शुल्क भी मनमाने तरह से वसूला जा रहा था। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने अवैध तरह से मेला संचालन होने की अनदेखी की थी।
मेला संचालित करने वाली फर्म पर जुर्माना लगाने के साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका भी जांच कराई जा रही है। कांग्रेस पार्षद मुकेश सिंह चौहान कहते हैं कि यह गंभीर मामला है।
गोमती नदी के किनारे झूलेलाल पार्क में समयावधि खत्म होने के बाद भी मेले का संचालन हो रहा था और जोन तीन के अधिकारी व कर्मचारी शांत बैठे थे, इसमें दाल में कुछ काला जैसा है। इसकी जांच कराकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
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