मकर संक्रांति से तीज तक दो हजार से अधिक पक्षी पतंग की डोर से घायल। फोटो सोर्स- सोशल मीडिया।
सुभाष चंद्र, हिसार। मकर संक्राति से तीज त्योहार तक हिसार में करीब 2000 से अधिक पक्षी पतंग की डोर से हर वर्ष घायल हो जाते हैं। हिसार सहित अन्य जिलों में बच्चे व युवा मकर संक्रांति से पतंग उड़ाना शुरू कर देते है।
लेकिन आज के समय में पतंग उड़ाने के लिए अधिकतर चाइनीज मांझे का प्रयोग किया जा रहा है। जिसमें उलझकर पक्षी घायल हो जाते है। इन घायल पक्षियों को उपचार देने का काम कर रहे हैं हिसार की डिफेंस कॉलोनी के रहने वाले रोहताश।
उन्होंने बताया कि उनके साथ गर्व, साहिल, पवन, गौरव, यश, गीतिका भी पक्षियों की जीवों की रक्षा करते हैं। हर वर्ष करीब 2000 से अधिक पतंग की डोर से घायल हुए पक्षियों का इलाज करते है। 17 वर्षों में 35 हजार से अधिक पक्षियों व पशुओं का इलाज कर चुके हैं।
शुरुआत में अपने खर्चे पर पशुओं व पक्षियों का इलाज करवाया, वहीं बाद में कई लोगों ने भी पशु-पक्षियों के इलाज में सहयोग किया। अधिकतर पशु-पक्षियों का लुवास विश्वविद्यालय में ले जाकर इलाज करवाया है।
वर्ष 2021 में बनाया ट्रस्ट
रोहताश ने बताया कि वर्ष 2021 में एनिमल एड फाउंडेशन ट्रस्ट बनाया। ट्रस्ट के माध्यम से पशु-पक्षियों के इलाज के लिए लोगों ने भी काफी सहयोग किया।
इन कारणों से हो जाते हैं घायल उन्होंने बताया कि चिड़िया, कबूतर, तोता, बाज, चील, बगुला, उल्लू, गुगी व कौवा आदि पक्षी पतंग की डोर से घायल हो जाते है।
इसके अलावा बिजली की तारों से करंट लगकर नीचे गिरकर भी घायल हो जाते हैं। सर्दी व गर्मी में भी पशु-पक्षी बीमार हो जाते है, तो उन पक्षियों का इलाज करवाते हैं। रोहताश ने बताया कि उनके पिता भी पशु-पक्षियों की सेवा करते हैं, उनसे ही प्रेरणा पाकर उन्होंने पशु-पक्षियों की सेवा शुरू की थी।
रोजाना करीब 50 कॉल आ रही
रोहताश ने बताया कि उनके पास घायल पशु व पक्षियों सहित अन्य जीवों के लिए रोजाना ही जिले व पूरे देश से ही 50 के करीब काल आ जाती है। वन्य जीवों में नीलगाय और गीदड़ का भी इलाज किया है। वन्य जीव विभाग का भी कई बार सहयोग लिया जाता है।
सकोरे व घोंसले भी बांट रहे
रोहताश ने बताया कि गर्मियों में पक्षियों के लिए पानी के सकोरे व घोंसले भी बांटते हैं। वहीं अपनी टीम से जुड़े कई लोगों के घरों में सकोरे व घोंसले लगवाए हैं। रोहताश ने बताया कि चाइनीज मांझे का प्रयोग न किया जाए, क्योंकि यह टूटता नहीं है, जिससे उलझकर पक्षी घायल हो जाते हैं। |