जंगलों में तलाशी अभियान करतीं वीडीजी महिलाएं (जागरण फोटो)
राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू संभाग के आतंकग्रस्त डोडा-किश्तवाड़ और रियासी जिला के विभिन्न इलाकों में हाथों में राइफल लिए ग्राम रक्षा दल (वीडीजी) की महिला सदस्य आतंकियों का सामना करने के साथ खुद और दूसरों की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रही हैं।
इन क्षेत्रों में सर्दियों में अधिकांश वीडीजी पुरुष सदस्य रोजी रोटी कमाने के लिए पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली आदि राज्यों में चले जाते हैं जिनके पीछे से उनकी महिलाएं वीडीजी बनकर सुरक्षा देख रही हैं। आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए महिलाओं के दस्ते जंगल में निरंतर गश्त करते हैं।
महिलाओं को दिया जाता है प्रशिक्षण
भद्रवाह के पुलिस अधीक्षक विनोद शर्मा ने बताया कि वीडीजी महिला सदस्यों को हथियार चलाने, नाका लगाने, गश्त करने व खतरे का आभास होने पर कार्रवाई का प्रशिक्षण दिया जाता है। कई महिलाएं अभी भी प्रशिक्षण ले रही हैं। थ्रीनाटथ्री राइफलों से लैस ये महिलाएं जिन इलाकों में रहती हैं, उनमें से कई सड़क के अभाव में अत्यंत दुर्गम क्षेत्र हैं।
महिला वीडीजी को प्रशिक्षण देने वाले एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि आप उनसे बातचीत करेंगे तो पता चलेगा कि वे देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए भी समर्पित हैं।
बता दें कि राजौरी के कलसी इलाके में गुज्जर युवती रुखसाना कौसर ने वर्ष 2009 में लश्कर के एक आतंकी को मार गिराया था। इस उपलब्धित के लिए उसे देश का दूसरा सबसे बड़ा शांति काल का वीरता पुरस्कार कीर्ति चक्र दिया गया।
आतंकियों को मार गिराने में निभाई अहम भूमिका
डोडा और किश्तवाड़ में बी कई बार महिला वीडीजी ने अपने पुरुष साथियों के साथ मिलकर आतंकियों को मार गिराने में अहम भूमिका निभाई है। एसपी विनोद शर्मा ने कहा कि डोडा, किश्तवाड़ और रामबन जिलों में वीडीजी महिलाएं अपने पुरुष साथियों की गैर-मौजूदगी में आतंकियों का मुकाबला करने और अपने गांवों की रक्षा करने के लिए एक भरोसेमंद फोर्स के तौर पर सामने आई हैं।
वीडीजी में हिंदू और मुस्लिम दोनों सदस्य शामिल हैं। सिविली गांव की एक वीडीजी शिवानी (21) ने कहा कि हमें जमीनी स्तर पर लड़ने की ट्रेनिंग दी गई है और हम सभी देश के दुश्मनों का सामना करने के लिए तैयार हैं।
भद्रवाह विधायक दिलीप सिंह परिहार ने कहा वीडीजी महिलाओं की मौजूदगी से गांव में भी आतंकी दाखिल होने से परहेज करते हैं। |
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