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HIV पॉजिटिव कहकर सबने ठुकराया, परिवार ने मोड़ा मुंह, सतना जिला अस्पताल बना उम्मीद की आखिरी किरण

deltin33 1 hour(s) ago views 575
  

एचआईवी पॉजीटिव मरीज की सर्जरी करने वाली डॉक्टरों की टीम।  



डिजिटल डेस्क, जबलपुर। सतना जिला अस्पताल ने चिकित्सा जगत में मानवता और संवेदनशीलता की ऐसी मिसाल पेश की है, जो समाज को सोचने पर मजबूर करती है। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल और एचआईवी संक्रमित पाए गए 40 वर्षीय युवक को जब परिवार से लेकर बड़े मेडिकल संस्थानों तक ने ठुकरा दिया, तब जिला अस्पताल के डॉक्टर उसके लिए जीवनरक्षक बने।

करीब 20 दिन पहले हुए सड़क हादसे में युवक का पैर बुरी तरह फ्रैक्चर हो गया था। परिजन उसे इलाज के लिए सतना जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। जांच के दौरान एक्स-रे के साथ ब्लड टेस्ट में युवक के एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई। इसके बाद एहतियातन माता-पिता और पत्नी की जांच कराई गई, जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आई।
HIV की पुष्टि के बाद अकेला पड़ गया मरीज

एचआईवी संक्रमण सामने आते ही इलाज की राह मुश्किल होती चली गई। आरोप है कि इस खुलासे के बाद परिजनों ने भी उसका साथ छोड़ दिया। बेहतर इलाज की उम्मीद में युवक रीवा मेडिकल कॉलेज पहुंचा, लेकिन वहां भी एचआईवी का हवाला देकर सर्जरी से इंकार कर दिया गया।
सतना जिला अस्पताल ने दिखाई इंसानियत

निराश और टूट चुका युवक एक बार फिर सतना जिला अस्पताल लौटा और अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. शरद दुबे को अपनी पीड़ा बताई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉ. दुबे ने तुरंत विशेष मेडिकल टीम गठित की, जिसमें डॉ. अतीक खान और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. शुभी को शामिल किया गया।

युवक पेशे से वाहन चालक है और उसकी आजीविका पूरी तरह उसके स्वस्थ होने पर निर्भर थी। ऐसे में सर्जरी उसके भविष्य के लिए बेहद जरूरी थी।
पूरी सुरक्षा के साथ सफल ऑपरेशन

बुधवार को ट्रॉमा सेंटर के मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर में सभी निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए जटिल सर्जरी की गई। डॉक्टरों और स्टाफ ने पीपीई किट पहनकर करीब ढाई घंटे तक चले ऑपरेशन में युवक के पैर के पंजे और घुटने की सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की।

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सर्जरी से पहले मरीज को एआरटी सेंटर में पंजीकृत कर एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी भी शुरू कराई गई थी। ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और फिलहाल युवक खतरे से बाहर है। उसे निगरानी में रखा गया है।

एहतियात के तौर पर ऑपरेशन थिएटर को पूरी तरह डिसइन्फेक्ट कर 24 घंटे के लिए सील किया गया, जबकि सभी उपकरणों को ऑटोक्लेव प्रक्रिया से सेनेटाइज किया गया।


मानवता से ऊपर कुछ नहीं है। एचआईवी पॉजिटिव मरीज की सर्जरी पूरी सावधानी के साथ की गई है और मरीज सुरक्षित है।
- डॉक्टर शरद दुबे, आरएमओ
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