इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में मुस्लिम बुद्धिजीवियों से संवाद करते राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल। हरीश कुमार
नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। मुस्लिम समाज से दूरी पाटने की कोशिशों के क्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने देश के प्रमुख मुस्लिम बुद्धिजीवियों से इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में खुला संवाद किया। संघ के सहसरकार्यवाह डाॅ. कृष्ण गोपाल ने कहा है कि हजारों साल की समस्या का समाधान टकराव में नहीं संवाद में है। इतिहास को भुलाया नहीं जा सकता, लेकिन अच्छे आचरण से उसके घावों पर मरहम लगाया जा सकता है। यह एक दिन में नहीं होगा, उसमें लंबा वक्त लगेगा। अच्छी बात है कि हम आगे बढ़ रहे हैं। यह जारी रहनी चाहिए।
इसका आयोजन इंटर फेथ हार्मोनी फाउंडेशन आफ इंडिया द्वारा किया गया था, जिसमें 50 के करीब बुद्धिजीवी मौजूद रहे। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाइ कुरैशी, दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, जनरल (सेवानिवृत्त) जमीरूद्दीन खान, उद्याेगपति सईद शेरवानी समेत अन्य प्रमुख लोगों ने भी विचार व सवाल रखें। अध्यक्षता आयोजक ख्वाजा इफ्तिखार चौधरी ने की।
डाॅ. कृष्ण गोपाल ने लाल किला धमाके का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षित और पेशेवर युवाओं का कट्टर विचारधारा की ओर आकर्षित होना गंभीर चिंता का विषय है। यह जानना जरूरी है कि कौन और कौन-सी विचारधारा उन मानसिकताओं को जहर दे रही है। ये घटनाएं बीमारी नहीं, बल्कि बीमारी के लक्षण हैं। असली समस्या गहराई में बैठी मानसिकताओं की है, जिन्हें पहचानकर समाप्त करना आवश्यक है। उसे रोकना, टोकना और देखना होगा।
आगे उन्होंने नागरिकता और राष्ट्रभाव के अंतर को रेखांकित करते हुए कहा कि केवल नागरिक होना राष्ट्रवादी होने का प्रमाण नहीं है। सवाल कि हमें क्या हजारों साल पुरानी अपनी संस्कृति और देश पर गर्व है। यह सवाल आजादी के कुछ माह बाद ही पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पूछा था। यह सवाल उन चंद लोगों के लिए है, जो पांच प्रतिशत ही हैं। भारतीय संगीत, साहित्य, भाषा और भक्ति परंपरा में मुस्लिम समाज का योगदान उल्लेखनीय है। देश की संस्कृति का विकास पारस्परिक स्वीकार्यता और आत्मसात करने की परंपरा से हुआ है, जिसे कुछ कट्टर और अलगाववादी विचारधाराओं ने नुकसान पहुंचाया।
आएसएस के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल ने कहा है कि देश में कुछ घटनाएं होती रही हैं, उसे पूरे समाज या राष्ट्र से जोड़कर देखना न तो न्यायसंगत है और न ही समाधानकारी। हर समाज में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो उकसावे और प्रतिक्रिया की राजनीति करते हैं। उन्होंने कहा, न हिंदू समाज पूरा संघ है और न मुस्लिम समाज किसी एक विचारधारा से संचालित होता है। पूरे समाज को किसी एक संगठन या व्यक्ति से जोड़ना अन्याय है। इसे सामने रखेंगे तो संवाद समाधान तक नहीं पहुंच सकेगा।
रामलाल ने स्पष्ट किया कि यह संवाद संघ के हित के लिए नहीं, बल्कि देश के हित के लिए है। देश जब मजबूत और एकजुट होगा, तभी वह दुनिया में शांति, सद्भाव और आतंकवाद-मुक्त भविष्य की दिशा में मार्गदर्शन कर सकेगा। इंटरनेट मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और फेक वीडियो पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि कई बार तथ्यों की जांच करने पर पता चलता है कि घटनाएं या तो पूरी तरह फर्जी होती हैं या बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत की जाती हैं।
कांग्रेस पार्टी ने बनाई है भाजपा को संघ की मजबूरी
रामलाल ने सत्तारूढ़ भाजपा से संघ से जुड़ाव के सवाल पर कहा कि हम उनका (भाजपा) साथ क्यों देते हैं तो उसका बड़ा सीधा जवाब है। मैं बहुत सारे कांग्रेस के लोगों से मिलता हूं। उनसे कहता हूं जब तक आप संघ को गाली देते रहोगे तब तक हम भाजपा का समर्थन करते रहेंगे।अब यह संघ को गाली देना तो बंद करो ना, आप समर्थन चाहो तो सही। मैं, कांग्रेस को कहता हूं आपने संघ की मजबूरी भाजपा बना दी है। रोज -रोज हमें गाली दाेगे तो हम कैसे आपका साथ देंगे?
संवाद में उमर खालिद की जमानत व भड़काऊ बयानों का जिक्र
संवाद प्रक्रिया में मुस्लिम बुद्धिजीवियों द्वारा मुस्लिमों के राष्ट्रप्रेम पर बार-बार सवाल उठाने पर चिंता जताई तो साम्प्रदायिक घटनाओं पर सरकार द्वारा त्वरित प्रतिक्रिया न जताने पर निराशा प्रकट की। नजीब जंग ने उमर खालिद को पांच वर्ष बाद भी जमानत न मिलने तथा मुस्लिम दमनकारियों द्वारा मंदिरों को तोड़ने की घटनाओं को याद रखने जैसे सत्ता पक्ष की ओर से बयानों को सद्भाव की राह में रोड़ा बताया।
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