मां के साथ बैठे सोबरन।
जागरण संवाददाता, मैनपुरी। पत्नी और पुत्री की हत्या के मामले में सजा काटने वाले आरोपित को न्यायालय द्वारा संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। दो दिन पूर्व जब वह घर पहुंचा तो 11 साल बाद पुत्र को देख वृद्ध मां लिपटकर रोने लगी। पीड़ित ने बताया कि उधार लिए चार लाख रुपये न देने पड़ें, इसलिए फुफेरी सास और साले ने झूठा मामला दर्ज कराकर उन्हें फंसाया था, जबकि उनके ससुर और पत्नी के स्वजन ने कार्रवाई से मना कर दिया था। अब वह भी न्याय के लिए आगे की लड़ाई लडेंगे।
पत्नी और पुत्री की हत्या के आरोपित को न्यायालय ने किया बरी
पत्नी और पुत्री की हत्या के झूठे आरोप में 11 साल पांच माह की सजा काटकर सोबरन सिंह प्रजापति 13 जनवरी को रिहा होकर करहल क्षेत्र के गांव रूपपुर पहुंचे तो उनकी वृद्ध मां द्रोपदी देवी देखते ही फफक पड़ीं। 11 वर्ष बाद पुत्र को देखकर लिपटकर खूब रोईं। शुक्रवार को जब सोबरन सिंह से जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि उनकी ससुराल फर्रुखाबाद जिले के थाना मोहम्मदाबाद क्षेत्र के समुतुइया में है। वह पंजाब के भठिंडा में रहकर दूध की डेयरी चलाते थे।
झूठा मामला दर्ज करा फुफेरी सास और साले ने फंसाया
गांव में पत्नी ममता देवी, 12 वर्षीय पुत्री सपना, सात वर्षीय पुत्री पूनम, छह बर्षीय पुत्री अंकुश कुमारी, ढाई वर्षीय पुत्र अंशू और सवा साल के पुत्र सुमित के साथ रहती थीं। जनवरी 2014 में वह गांव आ गए। इस बीच उनकी फुफेरी सास सुदामा देवी और उनका पुत्र रजनेश निवासी नगला पजाबा कोतवाली मैनपुरी ने पत्नी से ट्रैक्टर खरीदने के लिए चार लाख रुपये उधार ले लिए और जल्द वापस करने की बात कही। काफी समय तक रुपये वापस नहीं मिले तो पत्नी उन पर रुपये देने का दबाव बनाने लगी।
29 जून को उनकी पत्नी और पुत्री की मृत्यु हो गई
26 जून को वह इटावा के थाना सैफई क्षेत्र के गांव लचवाई में रह रहीं बहन के यहां चले गए थे। तभी 29 जून को उनकी पत्नी और पुत्री की मृत्यु हो गई। जब तक वह अपनी बहन के यहां से आए तब तक रजनेश ने उनके खिलाफ पत्नी और पुत्री की हत्या की प्राथमिकी दर्ज करा दी और ट्रैक्टर में लादकर सारा सामान ले गया था। जबकि ससुर सतीश चंद्र ने कोई भी कार्रवाई करने से साफ इंकार कर दिया था।
पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए बार-बार दबिश दे रही थी तो उन्होंने चार जुलाई को न्यायालय में आत्म समर्पण कर दिया था। फुफेरी सास और साले ने झूठा मामला दर्ज कराकर उन्हें फंसाया था। उनकी पैरवी बहनोई हरीशंकर ने की थी। अब वह भी न्यायालय पाने के लिए कानून का सहारा लेंगे।
अबोध बच्चों का दादी ने किया पालन
पत्नी और पुत्री की हत्या के मामले में सोबरन सिंह ने न्यायालय में आत्म समर्पण कर दिया। अन्य बच्चों का पालन वृद्ध दादी ने किया। घटना के करीब दो साल बाद पूनम को नाना सतीश ले गए और सवा साल के सुमित को रजनेश अपने घर ले गया था। ननिहाल में रह रही पूनम की शादी हो चुकी है। जबकि अन्य बच्चे अब बड़े हो गए हैं। सोबरन ने बताया कि अब वह अपने पुत्र सुमित को भी रजनेश के यहां से लाएंगे।
ये था मामला
मामले के अनुसार रूपपुर निवासी ममता देवी और उनकी 12 वर्षीय पुत्री सपना की 29 जून 2014 को मृत्यु हो गई थी। मामले की प्राथमिकी पति सोबरन सिंह प्रजापति के खिलाफ हत्या किए जाने की दर्ज कराई गई थी। पुलिस उनकी तलाश में जुटी तो सोबरन सिंह ने न्यायालय में जाकर आत्म समर्पण कर दिया था।
एडीजे न्यायालय में सुनवाई के बाद एक मार्च 2017 को सोबरन को फांसी की सजा सुनाई गई। मामला उच्च न्यायालय पहुंचा तो यहां उच्च न्यायालय ने सजा को बरकरार रखा। सजा के खिलाफ सोबरन सिंह के स्वजन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की तो सुप्रीम कोर्ट ने जिला न्यायालय को नए सिरे से मामले की सुनवाई के आदेश दिए। जहां सुनवाई के बाद न्यायालय ने सोबरन सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। |
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