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कक्षा में प्रोफेसर ने हिटलर से की PM मोदी की तुलना, विरोध करने पर छात्र का उत्पीड़न; मानवाधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। फाइल फोटो



राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। प्रधानमंत्री और भारतीय सेना के समर्थन में विचार रखने को लेकर सोनीपत स्थित ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में एक मेधावी छात्र के साथ कथित रूप से शैक्षणिक उत्पीड़न और संस्थागत प्रतिशोध किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है।

आरोप है कि कक्षा में राष्ट्र, सरकार और सशस्त्र बलों के पक्ष में राय व्यक्त करने के बाद छात्र को सार्वजनिक अपमान, बार-बार फेल किए जाने और शिकायत वापस लेने के दबाव का सामना करना पड़ा।

एक छात्र के पिता विश्व बजाज की शिकायत पर हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए शिक्षा विभाग, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग के सदस्य दीप भाटिया द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया मामला छात्र की गरिमा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निष्पक्ष शैक्षिक मूल्यांकन के अधिकार से जुड़ा प्रतीत होता है।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी संबंधित प्राधिकरण अगली सुनवाई से पहले अपने-अपने जवाब दाखिल करें। शिकायत के अनुसार छात्र एक मेधावी अभ्यर्थी है और उसकी अकादमिक पृष्ठभूमि सुदृढ़ रही है। विवाद 31 अक्टूबर 2025 को उस समय शुरू हुआ जब छात्र ने फिल्म ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ पर एक निबंध प्रस्तुत किया।

आरोप है कि इस विषयवस्तु को कुछ शिक्षकों ने वैचारिक रूप से आपत्तिजनक माना और यहीं से छात्र के प्रति रवैया बदल गया। 3 नवंबर 2025 को कक्षा के दौरान भारत सरकार, प्रधानमंत्री और भारतीय सेना की सराहना को लेकर छात्र से सवाल-जवाब किए गए, जिन्हें शिकायतकर्ता ने अपमानजनक और दबावपूर्ण बताया है। आरोप है कि छात्र के उत्तरों के बाद उसके प्रति नकारात्मक टिप्पणी और व्यवहार बढ़ गया।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि 7 नवंबर 2025 को “पालिटिक्स ऑफ रिप्रेज़ेंटेशन” पाठ्यक्रम की कक्षा में प्रधानमंत्री की तुलना एडोल्फ हिटलर से की गई तथा राष्ट्रीय सुरक्षा अभियानों को महज़ प्रचार और ब्रांडिंग बताया गया। जब छात्र ने इन टिप्पणियों का विरोध करते हुए सरकार और सेना के पक्ष में अपनी बात रखी, तो कथित तौर पर उसे जानबूझकर निशाना बनाया जाने लगा।

आरोप है कि छात्र द्वारा प्रस्तुत अकादमिक रिव्यू को अस्वीकार करते हुए उसे विषय में अनुत्तीर्ण घोषित कर दिया गया। बाद में कुलपति स्तर की जांच में यह पाया गया कि छात्र को फेल किया जाना अनुचित था, जिसके बाद उसका आंतरिक मूल्यांकन संशोधित कर उसे उत्तीर्ण घोषित किया गया।

29 नवंबर 2025 को जूरी मूल्यांकन के दौरान एक तकनीकी त्रुटि से किसी अन्य छात्र का दस्तावेज़ अपलोड हो गया, जिसे ठीक कर दिया गया। इसके बावजूद, बिना किसी साहित्यिक चोरी के प्रमाण के, छात्र को ‘प्रोजेक्शन ड्राइंग’ विषय में फेल घोषित कर दिया गया।

शिकायत में आरोप है कि 9 दिसंबर 2025 को कार्यकारी डीन ने शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया और इनकार करने पर पुन: अनुत्तीर्ण किया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार छात्र गंभीर मानसिक और शारीरिक तनाव से गुजर रहा है और उसे अकादमिक व संस्थागत प्रतिशोध का भय है।

मामले की जानकारी सोनीपत पुलिस सहित अन्य प्राधिकरणों को दी गई, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इन परिस्थितियों में हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।

आयोग ने यूजीसी, पुलिस आयुक्त और विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार से विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए कहा कि मानवाधिकार उल्लंघन पाए जाने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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