इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में नोएडा प्राधिकरण सीईओ डॉ. लोकेश एम हटाए गए।
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में शासन ने कार्रवाई करते हुए नोएडा प्राधिकरण सीईओ डॉ. लोकेश एम को हटाकर प्रतीक्षारत कर दिया है, लेकिन अब भी बड़ा सवाल कायम है कि इंजीनियर की मौत के अन्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब।
यह सवाल भी कायम है कि इंजीनियर की मौत का कारण सिर्फ प्राधिकरण की लापरवाही है अथवा घटनास्थल पर बचाव दल के रूप में मौजूद दमकल विभाग, एसडीआरएएफ व पुलिस इनकी मौजूदगी में इंजीनियर बेबस पिता के सामने मौत के मुंह में समाता रहा।
हालांकि दमकल, एसडीआरएफ और पुलिस घना कोहरा, शून्य दृश्यता होने की बात कहकर अपना बचाव कर रहा है। मौके पर दमकल विभाग, एसडीआरएफ और पुलिक के 80 जवान मौजूद थे। सभी की घोर लापरवाही सामने आई है। यह लोग ठंड़ा पानी बताकर युवराज को बचाने से बचते रहे जबकि एक डिलीवरी ब्वाय, जिसके पास सुरक्षा के इंतजाम भी नहीं थे, वह रस्सी बांधकर 30 फीट पानी में उतर गया, लेकिन पुलिस, दमकल और एसडीआरएफ के जवान मूकदर्शक बनकर तमाशा देखते रहे। मृतक के पिता का भी यही सवाल है कि आखिर इन जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब।
हाइटेक जनपद जिसे प्रदेश का शो विंडो कहा जाता है और तस्वीर दिखा कर उत्तर प्रदेश सरकार वाहवाही लूटती है, वह कागजों में तो बहुत एडवांस और एक्टिव है, लेकिन जमीनी स्तर पर खोखला है। इसे खोखला बनाने वाले जो लोग जिम्मेदार हैं अथवा जिन्होंने इस जिले के लिए संसाधन उपलब्ध नहीं कराए उन पर कार्रवाई कब यह भी सवाल है।
युवराज की मौत के मामले में सिर्फ प्राधिकरण ही नहीं बल्कि वह सब जिम्मेदार हैं, जिन्हें यह संसाधन उपलब्ध कराने थे। इस घटना के बाद लोगों में रोष है। लोगों का कहना है कि बचाव दल का घटनास्थल पर मौजूद होने के बाद ही एक युवक को नीं बचाया जा सका। यह दर्शाता है कि जिनके भरोसे लाखों लोगों की जिंदगी है, वह ऐसी स्थिति से निपटने के लिए कितने तैयार हैं। लोगों ने कैंडल मार्च निकाल कर अपने गुस्से को जाहिर किया था।
लोगों ने कहा कि कठिन परिस्थिति में किस तरह विवेक से काम लेते हुए बचाव कार्य किया जाता है, उसका घंटों का प्रशिक्षण लेने के साथ ही समय समय पर माक ड्रिल के जरिये बचाव कार्य का अभ्यास करते रहते हैं, लेकिन जब समय आया तो इंजीनियर को नहीं बचा सके। करीब ढाई घंटे युवराज जिंदगी और मौत के बीच झूलते रहे, लेकिन बचाव दल एक भी तरकीब नहीं निकाल सका जिससे उसे बचाया जा सके।
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