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बांका: प्रखंड में कार्यालय समय की उड़ रही धज्जियां, अधिकारी-कर्मियों की मनमानी चरम पर

deltin33 1 hour(s) ago views 441
  

प्रखंड में कार्यालय समय की उड़ रही धज्जियां। फोटो जागरण



संवाद सूत्र, रजौन (बांका)। सरकार द्वारा सोमवार और शुक्रवार को आम जनता की समस्याएं सुनने के लिए अधिकारियों को अनिवार्य रूप से कार्यालय में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। इसके बावजूद प्रखंड व अंचल सहित अन्य सरकारी कार्यालयों में पदाधिकारियों और कर्मियों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। कार्यालय समय का खुलेआम उल्लंघन होने से आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थिति यह है कि कई कार्यालय निर्धारित समय पर खुलते ही नहीं हैं और जो कार्यालय खुलते भी हैं, उनमें अधिकांश पदाधिकारी और कर्मी नदारद रहते हैं। दूर-दराज से विभिन्न कार्यों के लिए आने वाले लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, लेकिन अधिकारी समय पर नहीं पहुंचते।

सोमवार को दैनिक जागरण की टीम ने सुबह 10:30 बजे से 11:30 बजे तक प्रखंड व अंचल कार्यालय का पता किया तो प्रशासनिक लापरवाही की पूरी तस्वीर सामने आ गई। सुबह 11:30 बजे तक बीपीआरओ, आपूर्ति विभाग के एमओ, सीडीपीओ, लेबर इंस्पेक्टर, राजस्व पदाधिकारी, अंचल नाजीर कार्यालय सहित कई महत्वपूर्ण कार्यालयों में ताले लटके मिले। दूसरे तल पर स्थिति और भी गंभीर रही, जहां बीपीआरओ कार्यालय, प्रखंड आपूर्ति कार्यालय और बाल विकास कार्यालय पूरी तरह बंद पाए गए।

हालांकि इस दौरान बीडीओ अंतिमा कुमारी, सीओ कुमारी सुषमा और आरटीपीएस काउंटर के कर्मी समय पर उपस्थित मिले। बताया जाता है कि बीपीआरओ, एमओ और सीडीपीओ के आने-जाने का कोई निश्चित समय नहीं है, जिससे आमजन को उनसे मिलने के लिए घंटों प्रतीक्षा करनी पड़ती है।

महादेवपुर निवासी एक वृद्ध व्यक्ति सुबह 10:30 बजे से प्रखंड कार्यालय की सीढ़ी पर बैठकर आपूर्ति और राजस्व पदाधिकारी का इंतजार करता रहा। उसने बताया कि कई दिनों से चक्कर लगा रहा है, लेकिन समय पर कोई अधिकारी नहीं मिलता। इसी तरह राहुल कुमार लेबर इंस्पेक्टर से मिलने के लिए घंटों इंतजार करता रहा, लेकिन निराश होकर लौटना पड़ा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रोज की समस्या बन चुकी है। जबकि बिहार सरकार की सात निश्चय–3 योजना के तहत सबका सम्मान–जीवन आसान कार्यक्रम में सोमवार और शुक्रवार को अधिकारियों को जनता की समस्याएं सुननी हैं, इसके बावजूद अधिकांश पदाधिकारी अपने दायित्वों से मुंह मोड़ते नजर आए।
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