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BPSC शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच का काम एक बार फिर तेज
जागरण संवाददाता, बांका। शिक्षक बहाली में फर्जीवाड़े के लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच एक बार फिर शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच तेज कर दी गई है। जिले में विशिष्ट, नियोजित और बीपीएससी से बहाल शिक्षकों के शैक्षणिक एवं प्रशैक्षणिक प्रमाण पत्रों की सघन जांच चल रही है। निगरानी ब्यूरो द्वारा वर्षों से की जा रही जांच में हाल के दिनों में आधा दर्जन नए फर्जी मामलों का खुलासा हुआ है।
इसके साथ ही सौ से अधिक शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की फोटोकापी को संदिग्ध मानते हुए उनकी दोबारा सत्यापित प्रति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। जिला निगरानी सेल के पास पहले से उपलब्ध प्रमाण पत्रों की गहन पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होते ही दोषी शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।
वहीं, विभागीय आदेश के बाद बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) से पिछले तीन चरणों में बहाल सभी शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच भी शुरू कर दी गई है। इसके लिए जिले के सभी प्रखंड संसाधन केंद्र में विशेष शिविर लगाकर शत-प्रतिशत शिक्षकों से प्रमाण पत्र जमा करा लिए गए हैं।
जांच के दौरान शिक्षकों को बहाली के समय जमा किए गए वाटरमार्क युक्त प्रमाण पत्र की सत्यापित प्रति ही प्रस्तुत करनी अनिवार्य की गई है। इसके अलावा स्थानांतरण के बाद जिले में नए आए शिक्षकों को भी अपने प्रमाण पत्र जांच के लिए जमा करने होंगे। शैक्षणिक एवं प्रशैक्षणिक प्रमाण पत्रों के साथ-साथ पैन कार्ड और आधार कार्ड की प्रतियां भी जांच में शामिल की गई हैं।
बीआरसी में जमा प्रमाण पत्रों की प्रारंभिक जांच में ही हर प्रखंड से दो से चार फर्जी शिक्षक सामने आए हैं। कहीं शिक्षक के पास आवश्यक योग्यता नहीं पाई गई, तो कहीं विषय में ही गड़बड़ी उजागर हुई है। अब इन मामलों की जिला स्तर पर विस्तृत जांच कर आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
निगरानी के शिकंजे में फंस चुके 90 फर्जी शिक्षक
निगरानी ब्यूरो की जांच में अब तक जिले में 90 से अधिक फर्जी शिक्षक पकड़े जा चुके हैं। सभी के खिलाफ संबंधित थानों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। इनमें से आधा दर्जन शिक्षकों को विद्यालय से ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि अधिकांश आरोपी शिक्षक अभी फरार चल रहे हैं। इससे पहले हाईकोर्ट के आदेश पर जिले के 107 संदिग्ध शिक्षकों ने कार्रवाई से बचने के लिए त्यागपत्र दे दिया था।
इसी तरह नियोजित शिक्षकों की सक्षमता परीक्षा के दौरान भी जिले में करीब दो दर्जन फर्जी शिक्षक पकड़े गए थे। इनमें से अधिकांश दूसरे के टीईटी प्रमाण पत्र और फर्जी पहचान के सहारे नौकरी कर रहे थे। शिक्षा विभाग ने उनके विद्यालय प्रवेश पर रोक लगाते हुए सेवा समाप्ति की प्रक्रिया शुरू की थी। हालांकि कई शिक्षक स्कूल छोड़कर फरार हो गए, जबकि कुछ दोबारा विद्यालय लौट आए हैं।
बीपीएससी शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच के लिए सभी बीआरसी में शिविर लगाया गया है। प्रमाण पत्रों को जिला स्तर से संबंधित बोर्डों को सत्यापन के लिए भेजा जाएगा। वहीं, पूर्व से नियोजित और विशिष्ट शिक्षकों की जांच निगरानी ब्यूरो द्वारा लगातार की जा रही है। - संजय कुमार यादव, डीपीओ, स्थापना |
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