ईरान में विरोध प्रदर्शनों का खूनी दमन
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान की सड़कों पर से \“मुल्लाओं को जाना होगा\“ और \“जाविद शाह\“ के नारे अचानक गायब हो गये हैं।
अब जो तस्वीर उभर रही है, वह अयातुल्ला अली खामेनेई के मौलवी शासन द्वारा थोपे गए डिजिटल ब्लैकआउट के पीछे छिपे भयानक अत्याचारों की है।
जेलों से आने वाली खबरें दिल दहला देने वाली हैं, जहां कैदियों को कड़ाके की सर्दी में नग्न रखा जा रहा है। कैदियों को अनजान इंजेक्शन दिए जा रहे हैं।
रान में विरोध प्रदर्शनों का खूनी दमन
ईरान से चोरी-छिपे बाहर आए वीडियो, जेल में बंद प्रदर्शनकारियों पर होते अत्याचार की कहानी सुना रहे हैं। प्रदर्शनों की लहर थमने के बाद काले बैगों में लिपटी लाशों की तस्वीरें वायरल हो रही हैं।
परिवारवाले अपनों की तलाश में दर-दर भटक रहे थे। दिसंबर के अंतिम हफ्ते में भड़के खामेनेई सरकार के खिलाफ विरोधी प्रदर्शन 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद सबसे घातक साबित हुए।
शुरू में आर्थिक संकट पर केंद्रित यह विरोध उस धार्मिक व्यवस्था के खिलाफ सीधी चुनौती बन गया, जो 45 सालों से ईरान पर काबिज है।
एक अनाम ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि अधिकारियों ने पुष्टि की है कि विरोध में कम से कम 5,000 लोग मारे गए हैं, जिसमें करीब 500 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी शामिल हैं।
अब तक 5000 से ज्यादा मौते
खामेनेई शासन ने पूरे जोर से प्रदर्शन को दबाया है। प्रदर्शन के दौरान वफादार इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को मैदान में उतारा गया। देशभर में इंटरनेट ब्लैकआउट कर दिया। विरोधियों को कुचलने के लिए 5,000 इराकी अरब मिलिशिया सदस्यों को भी बुलाया गया।
यह सब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की चेतावनियों के बीच हुआ था। बता दें ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों से डटे रहने की अपील की और तेहरान को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। इंटरनेट बंदी के बाद मौतों की सही संख्या जानना मुश्किल है।
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी (HRANA) के मुताबिक, मरने वालों की संख्या 4,029 पहुंच चुकी है।
संगठन का कहना है कि 26,015 लोग गिरफ्तार हुए, जबकि 5,811 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। ईरान इंटरनेशनल ने 12,000 तक मौतों का अनुमान लगाया, वहीं CBS न्यूज़ ने सूत्रों के हवाले से 20,000 तक का आंकड़ा सुझाया।
मोहारेब के आरोप में फांसी की सजा
शासन ने प्रदर्शनकारियों को \“मोहारेब\“ करार दिया, जिसका मतलब है \“भगवान के खिलाफ युद्ध करने वाला\“। इस आरोप में मौत की सजा दी जाती है।
खामेनेई ने विरोध के लिए अमेरिका और इजराइल से जुड़े आतंकवादी और दंगाई को जिम्मेदार ठहराया। न्यायपालिका ने भी यही दोहराया, जिससे बड़े पैमाने पर फांसी की सजा सुने गई।
26 साल दुकानदार इरफ़ान सुल्तानी को मोहरेब के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई ही। 14 जनवरी को फांसी होनी थी, लेकिन वैश्विक दबाव और ट्रंप की धमकियों के बाद इसे टाल दिया गया। शासन का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने सैकड़ों सुरक्षाकर्मियों को मार डाला।
हालांकि विरोध थम चुके हैं, लेकिन दमन की कहानियां अब छिप नहीं पा रही हैं। ठंड में नग्न करना, अज्ञात इंजेक्शन, सामूहिक कब्रें और जबरन कबूलनामे शायद सिर्फ शुरुआत भर हैं। इसके नीचे अकल्पनीय क्रूरता छिपी हो सकती है। |