इंजीनियर युवराज मौत मामले में विधायक का छलका दर्द। जागरण
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत से सरकार के साथ जनप्रतिनिधि भी जनता के सवालों के कटघरे में खड़े हैं। जनता हादसे में लापरवाही को लेकर उनसे सवाल कर रही है।
निरंकुश हो चुके अधिकारियों ने अगर जनप्रतिनिधियों के शिकायती पत्रों को गंभीरता से लेकर समस्या का समाधान किया होता तो आज सरकार और जनप्रतिनिधियों की जनता की अदालत में यूं किरकिरी न होती।
जिले के जनप्रतिनिधि अधिकारियों के आगे इस कदर बोने हैं कि उन्हें जनता की समस्याएं हल कराने के लिए सीधे मुख्यमंत्री के यहां दस्तक देनी पड़ती है। दादरी विधायक तेजपाल नागर का दर्द छलका है।
उन्होंने प्रदेश सरकार को पत्र भेजकर अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाया हे। उन्होंने यहां तक कहा है कि पत्र भेजने पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती। विधायक के पत्र से जाहिर है कि यहां तैनात अधिकारी निरंकुश हो चुके हैं।
गौतमबुद्ध नगर में अधिकारियों की फौज तैनात है, सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की तनख्वाह वसूलने वाले अधिकारी अपने कर्तव्यों को तिलांजलि दे चुके हैं। नागरिक तो दूर जनप्रतिनिधि भी उनके आगे बौने हैं। नोएडा में जिस जगह पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की नाकाम सिस्टम की वजह से मौत हुई। इससे सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
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सांसद महेश शर्मा और विधायक तेजपाल नागर ने प्राधिकरण को पत्र लिखे। उनके पत्रों पर गंभीरता से कार्रवाई करने के बजाए उन्हें फाइल में दबा दिया। किसान, उद्यमी, बिल्डर परियोजनाओं में खरीदारों की समस्याओं को हल करने के बजाए अधिकारी कुंडली मारकर बैठे हैं।
मुनेंद्र का केस नि:शुल्क लड़ेंगे अभिषेक
बेसमेंट के लिए खोदे गए प्लॉट में भरे पानी में डूब रहे युवराज को बचाने का प्रयास करने वाले डिलवरी ब्वॉय मुनेंद्र को पांच घंटे थाने में बैठाने पर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अभिषेक चौधरी स्तब्ध है। उन्होंने इस मुद्दे को कोर्ट में उठाने का निर्णय किया है। इसके साथ ही मुनेंद्र पर लगाए गए केस के खिलाफ कोर्ट में नि:शुल्क लड़ने का फैसला किया है। उनका है कि मददगार के प्रति अगर पुलिस का रवैया ऐसा है तो भविष्य में कोई भी किसी की मदद के लिए आगे आने को तैयार नहीं होगा।
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