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सुपरकंप्यूटर की जगह AI मॉडल से मानसून की डिटेल ली:30 दिन पहले ही सरकार ने किसानों को बारिश का अलर्ट भेजा, 38 लाख को फायदा

deltin55 2026-2-2 19:42:24 views 1240

भारत सरकार ने इस साल पहली बार पारंपरिक सुपरकम्प्यूटर मॉडल की जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मौसम मॉडल का इस्तेमाल किया। इन मॉडल्स के जरिए 38 लाख किसानों को मानसून से जुड़ी जानकारी दी गई।



AI मॉडल्स ने न सिर्फ 30 दिन पहले मानसूनी बारिश के आगमन का सही समय बताया, बल्कि बीच में 20 दिन बारिश रुकने की चेतावनी भी दी, जो पारंपरिक मॉडल नहीं पकड़ सके। किसानों ने बताया कि इन पूर्वानुमानों के आधार पर उन्होंने बुवाई और फसल चयन के फैसले लिए।

देश में मानसून केरल के रास्ते 2 जून को आता है, लेकिन इस बार 8 दिन पहले 24 मई को ही आ गया था। 11 अक्टूबर को मानसून की वापसी हुई। इस मानसूनी सीजन (जून-सितंबर) 937.2 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य बारिश 870 मिमी से 8% ज्यादा रही।



एआई मॉडल्स पुराने मौसम डेटा के पैटर्न पहचानकर अनुमान लगाते हैं। इससे वे कम संसाधनों और समय में सटीक भविष्यवाणी कर पाते हैं। इस बार भारत में दो प्रमुख मॉडल्स- ECMWF और गूगल का NeuralGCM- का संयुक्त रूप से उपयोग हुआ।

पारंपरिक नेचुरल वेदर प्रोसेसिंग और एआई का संतुलन बनाकर बेहतर परिणाम मिले। इस परियोजना का संचालन ह्यूमन-सेंटर्ड वेदर फोरकास्ट्स इनिशिएटिव (HCIF) ने किया। इसे गेट्स फाउंडेशन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से फंडिंग मिली।

HCIF इसे अफ्रीका, बांग्लादेश, चिली, इथियोपिया और केन्या जैसे देशों में भी लागू कर रहा है। इसकी खूबी ये है कि इन्हें सुपरकम्प्यूटर की जरूरत नहीं होती। ये साधारण लैपटॉप पर भी चल सकते हैं। इससे गरीब देशों को भी सटीक और समय पर मौसम जानकारी मिल सकती है।





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