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भारत और भूटान ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग और मजबूत करेंगे

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नई दिल्ली,


भारत और भूटान के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से भूटान के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री ल्योंपो जेम छेरिंग ने केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल के साथ बैठक की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऊर्जा सहयोग को नई दिशा देने पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के दौरान पुनात्सांगछू-द्वितीय जलविद्युत परियोजना (1020 मेगावाट) से विद्युत उत्पादन के व्यावसायिक अनुकूलन पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही पुनात्सांगछू-प्रथम जलविद्युत परियोजना (1200 मेगावाट) को शीघ्र चालू करने पर भी विशेष जोर दिया गया। आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।


सांकोश जलविद्युत परियोजना के भविष्य की दिशा पर भी चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त वर्ष 2040 तक विद्युत पारेषण अवसंरचना की योजना पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया, जिस पर वर्तमान में विस्तृत परामर्श जारी है। भूटान में कम वर्षा वाले महीनों के दौरान विद्युत आपूर्ति के निर्धारण की स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। दोनों मंत्रियों ने भारत और भूटान के बीच पारस्परिक मित्रता की सराहना की और इसे आगे और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। बैठक में विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक तथा विद्युत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।


उल्लेखनीय है कि Nov 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1020 मेगावाट की पुनात्सांगछू-द्वितीय जलविद्युत परियोजना का उद्घाटन किया था, जिसे भारत-भूटान द्विपक्षीय समझौते के तहत निर्मित किया गया है। यह दोनों देशों की ऊर्जा साझेदारी में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी गई। इसके साथ ही 1200 मेगावाट की पुनात्सांगछू-प्रथम परियोजना के मुख्य बांध ढांचे पर कार्य फिर से शुरू करने को लेकर भी सहमति बनी थी। भारत ने भूटान के आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए Rs.4000 करोड़ की ऋण सहायता प्रदान की है। यह सहायता अवसंरचना और विकास परियोजनाओं को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। द्विपक्षीय सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में भूटानी मंदिर और अतिथि गृह के निर्माण के लिए भूमि प्रदान करने की घोषणा की।


इसके अतिरिक्त, दोनों देशों ने गेलेफू के पार हातिसार में एक आव्रजन जांच चौकी स्थापित करने का निर्णय भी लिया है, जिससे आवागमन और व्यापारिक गतिविधियों को सुगम बनाया जा सके। प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को संस्थागत रूप देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते पर भूटान के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री ल्योंपो जेम छेरिंग और भारत के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद वेंकटेश जोशी ने हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोमास, ऊर्जा भंडारण, हरित हाइड्रोजन और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में मिलकर कार्य किया जाएगा।


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