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India Energy Week 2026: गोवा में भविष्य के ई-हाइवे की झलक, जहां गाड़ियां आपस में करेंगी बातेंं

deltin55 1 hour(s) ago views 2

               
गोवा में चल रहे इंडिया एनर्जी वीक 2026 में इस बार भविष्य की सड़क परिवहन तकनीक को लेकर एक खास स्टॉल आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यह स्टॉल आने वाले समय के इलेक्ट्रिक, इलेक्ट्रॉनिक और इंटेलिजेंट हाईवे की अवधारणा को पेश कर रहा है, जिसे आम भाषा में ई-हाइवे कहा जा रहा है. National Highways for Electric Vechiles से जुड़े कार्यक्रम निदेशक अभिजीत सिन्हा ने इसके बारे में जानकारी दी.


गोवा कार्यक्रम में उन्होंने बताया किभविष्य में भारत के हाईवे सिर्फ सड़कें नहीं रहेंगे, बल्कि टेक्नोलॉजी-ड्रिवन सिस्टम बनेंगे. आने वाले समय में देश में ऐसे हाईवे विकसित किए जाएंगे जो इलेक्ट्रिक भी होंगे और इलेक्ट्रॉनिक भी. यानी इन सड़कों पर चलने वाली गाड़ियां सिर्फ चार्ज नहीं होंगी, बल्कि एक-दूसरे से और सड़क के सिस्टम से सीधे संवाद भी कर सकेंगी.







इस नई अवधारणा में गाड़ियां आपस में जानकारी साझा करेंगी- जैसे ट्रैफिक की स्थिति, अचानक ब्रेक, हादसे की चेतावनी या सड़क की स्थिति. इसका सीधा फायदा यह होगा कि दुर्घटनाओं में कमी, ट्रैफिक का बेहतर प्रबंधन और यात्रा का अनुभव ज्यादा सुरक्षित और स्मार्ट बन सकेगा.

        

यह मॉडल बताता है कि भविष्य का हाईवे केवल ट्रांसपोर्ट का जरिया नहीं होगा, बल्कि एक कनेक्टेड डिजिटल नेटवर्क की तरह काम करेगा, जहां वाहन, सड़क और सिस्टम—तीनों एक-दूसरे से जुड़े होंगे.






इंडिया एनर्जी वीक में ग्रीन एनर्जी फ्यूचर पर भी फोकस किया गया है. इस दिशा में National Green Hydrogen Mission अहम पहल है, जिसका लक्ष्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन का ग्लोबल हब बनाना है. ग्रीन हाइड्रोजन सोलर और विंड एनर्जी की मदद से पानी को इलेक्ट्रोलाइसिस प्रक्रिया के जरिए तैयार की जाती है. इस प्रक्रिया में कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य होता है, इसलिए इसे क्लीन, सस्टेनेबल और फ्यूचर-रेडी फ्यूल माना जाता है.


सरकार ने इस मिशन के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय किए हैं. 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन का भारत का लक्ष्य है. इसके लिए 125 गीगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी का उपयोग, करीब 8 लाख करोड़ रुपये का निवेश, और फिर लगभग 6 लाख नए रोजगार का सृजन होगा.



इंडिया एनर्जी वीक में ग्रीन हाइड्रोजन पर भी फोकस है. दरअसल भारत ऊर्जा आयात निर्भरता कम करना चाहता है.इस संस्करण में Sustainable Aviation Fuel यानी SAF Zone तैयार किया गया है, जो ग्रीन एविएशन की दिशा में भारत की बढ़ती गंभीरता को दिखाता है. SAF जोन के जरिए भारत यह संदेश दे रहा है कि भविष्य की उड़ानें सिर्फ तेज़ ही नहीं, बल्कि ज्यादा क्लीन और पर्यावरण के अनुकूल भी होंगी.


SAF पर खास फोकस इसलिए है क्योंकि एविएशन सेक्टर को हार्ड-टू-अबेट सेक्टर माना जाता है. SAF ऐसा समाधान है, जो एयर ट्रैफिक बढ़ने के बावजूद उत्सर्जन घटाने में मदद करता है और नेट ज़ीरो लक्ष्यों को व्यवहारिक बनाता है.


भारत के लिए SAF का मतलब है ईंधन आयात पर निर्भरता कम करना, कृषि अपशिष्ट और इस्तेमाल किए गए कुकिंग ऑयल को आर्थिक मूल्य देना, रिफाइनरी सेक्टर के लिए नया ग्रीन बिज़नेस मॉडल तैयार करना और अंतरराष्ट्रीय एविएशन मानकों के साथ तालमेल बढ़ाना.



गोवा में चल रहे इंडिया एनर्जी वीक के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ ही यूएई के मंत्री और ADNOC के एमडी सुल्तान अहमद अल जाबेर और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने भी अपने-अपने संबोधन में ऊर्जा की अहमियत पर रोशनी डाली. और इसे एक अग्रणी अंतरराष्ट्रीय मंच बताया.

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