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जीएसटी घटने के बाद भी महंगी हुई दवाएं, फार्मा कंपनियों ने बढ़ाई 10 प्रतिशत एमआरपी

Chikheang 4 hour(s) ago views 308
  

सांकेतिक तस्वीर।



जागरण संवाददाता, आगरा: मरीजों को सस्ती दवाएं मिल सके, इसके लिए पिछले वर्ष सितंबर में दवाओं पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) 18 और 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया था। इसके आधार पर फार्मा कंपनियों को दवाओं की एमआरपी कम करनी थी।

मगर, फार्मा कंपनियों द्वारा सप्लाई की गईं दवाओं की नई खेप की एमआरपी से दवा कारोबारियों के होश उड़े हुए हैं। फार्मा कंपनियों ने जीएसटी कम करने के बाद एमआरपी 10 प्रतिशत और बढ़ा दी है। इससे दवाएं महंगी हो गईं हैं।
सितंबर 2025 में दवाओं पर 18 और 12 प्रतिशत की जगह जीएसटी कर दी गई थी पांच प्रतिशत

पिछले वर्ष 22 सितंबर को नई जीएसटी 2.0 व्यवस्था लागू होने के बाद जीवन रक्षक दवाओं पर शून्य प्रतिशत, 18 और 12 प्रतिशत जीएसटी वाली दवाओं पर जीएसटी घटाकर पांच प्रतिशत कर दी थी।

आगरा फार्मा एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी पुनीत कालरा ने बताया कि फार्मा कंपनियों द्वारा नई एमआरपी की दवाएं सप्लाई की गई हैं। जिन दवाओं पर 12 प्रतिशत जीएसटी थी, उन पर पांच प्रतिशत जीएसटी होने पर एमआरपी 6. 25 प्रतिशत कम होनी थी। जैसे यूकोमेल्ट ए ( निर्माण की तिथि अप्रैल 2025 ) की एमआरपी 128.70 रुपये थी, जीएसटी 12 प्रतिशत से घटकर पांच प्रतिशत होने पर नई एमआरपी 120 रुपये होनी चाहिए थी।
जीएसटी कम करते हुए 10 प्रतिशत दर बढ़ाकर नई एमआरपी की दवाएं की सप्लाई

मगर, अक्टूबर 2025 निर्मित यूकोमेल्ट ए पर एमआरपी 132.35 रुपये है। इस दवा पर कंपनी ने जीएसटी पांच प्रतिशत करने के बाद एमआरपी 10 प्रतिशत बढ़ा दी है इससे एमआरपी कम होने के बजाय बढ़ गई है। इसी तरह से अन्य दवाओं की एमआरपी भी बढ़ा दी गईं हैं।
दवाओं की जीएसटी कम होने से पहले की एमआरपी, जीएसटी कम होने के बाद की एमआरपी

  

  • म्यूकोमेल्ट ए पहले एमआरपी 128.70 रुपये, अब एमआरपी 132.35 रुपये (जीएसटी घटने के बाद एमआरपी होनी चाहिए थी 120 रुपये)
  • फ्लूटीवेज नेजल स्प्रे पहले एमआरपी 518 रुपये, अब एमआरपी 534 रुपये (जीएसटी घटने के बाद एमआरपी होनी चाहिए थी 485.63 रुपये)
  • सिरप एक्सोरिल फ्लू पहले एमआरपी 104.50 रुपये अब एमआरपी 107.34 रुपये (जीएसटी घटने के बाद एमआरपी होनी चाहिए थी रुपये 98 रुपये)
  • कैप्सूल सोमप्राज डी 40 पहले एमआरपी 265 अब एमआरपी 280 रुपये (जीएसटी घटने के बाद एमआरपी होनी चाहिए थी 248 रुपये)


सहायक औषधि आयुक्त अतुल उपाध्याय ने बताया कि जो दवाएं राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) में आती हैं उनके अधिकतम मूल्य निर्धारित हैं, इसमें कैंसर, हृदय रोग सहित तीन हजार से अधिक दवाओं के साल्ट हैं अन्य दवाओं की एमआरपी पर कोई नियंत्रण नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी, कंपनियां जीएसटी ज्यादा ले रहीं हैं तो कार्रवाई की जाएगी।
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