कराला गांव की गलियों में भरा गंदा पानी लोगों के लिए आफत बना।
संवाद सहयोगी, बाहरी दिल्ली। कराला गांव की गलियों में भरा गंदा पानी लोगों के लिए आफत बना हुआ है। लोग गंदे पानी के बीच से निकलने को मजबूर है। ग्रामवासियों को घरों से निकलना मुश्किल हो चुका है। नालियों की नियमित रूप से सफाई न होने की वजह से गलियों में जलजमाव की समस्या बनी हुई है।
करीब आठ माह से गांव की दो किलोमीटर से अधिक गलियों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में गांव के करीब एक हजार घरों के आसपास नाली का पानी ओवरफ्लो होकर भर जाता है। जिसकी वजह से लोगों का घरों से निकलने के लिए पानी के बीच राह तलाशनी पड़ती है। वहीं, गांव की करीब 5-6 गलियों में पानी के बीच से गुजरते समय हादसे का आशंका भी बनी रहती है।
सुबह स्थिति इतनी खराब होती है कि गलियों में करीब एक फुट से अधिक पानी भरा होता है। शाम होने के साथ-साथ धीरे -धीरे गलियों में जलस्तर कम होने लगता है। इस बीच स्कूली बच्चों व कामकाजी लोगों का गांव की इन गलियों से निकलना काफी चुनौतीपूर्ण रहता है। गलियों में नालियों के किनारे के पास से निकलते समय कदम डगमगाते ही लोगों के गिरने का खतरा भी बना रहता है।
गांव में तीन स्कूलों में दो प्राथमिक विद्यालय व एक सीनियर सेकेंडरी स्कूल है। जिनमें पढ़ने वाले लगभग एक हजार स्कूली बच्चे इन्हीं गलियों से होकर अपने स्कूल में पढ़ाई करने के लिए जाते है। कराला गांव की चौपाल, डिस्पेंसरी, राधा कृष्ण मंदिर, शिव मंदिर व पार्क के आसपास जलभराव की स्थिति लगातार बनी हुई है। लंबे समय से जलभराव होने की वजह से गंदे पानी से उठती दुर्गंध व पनपते मच्छरों की वजह से बीमारियों का खतरा भी बना हुआ है।
सुबह के समय गांव में स्थिति ज्यादा खराब होती है। पांच से 11 बजे के बीच गांव से बाहर निकलना काफी मुश्किल होता है। गांव की लगभग 5-6 गलियों में लगभग एक फुट तक नाली का गंदा पानी भर जाता है। ऐसे में हम लोग घर से भी नहीं निकल पाते। - विजेंद्र, कराला
गलियों में पानी भरा होने की वजह से महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। लोग नाली के किनारे होते हुए निकलते है। करीब आठ महीने होने के बाद भी समस्या का हल नहीं हो रहा। यहां रहना काफी मुश्किल हो रहा है।- जसवंत, कराला
मेरी आयु 70 वर्ष से अधिक है। गली में पानी भरे होने के कारण हादसे का डर रहता है। यहां कई लोग गिर चुके है। क्योंकि यहां निकलने का रास्ता नहीं होता। मजबूरन लोग जोखिम उठाकर निकलने का प्रयास करते है।- नारायणी, कराला
गांव की नालियों मुख्य सड़क पर पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) के नालों से जुड़े हुए हैं। जिनका निर्माण कार्य किया जा रहा है। जिसकी वजह से गांव की जल निकासी बाधित है।- मनीषा जसबीर, स्थानीय निगम पार्षद
यह भी पढ़ें- नरेला के स्मृति वन में पलाश महोत्सव: फूलों, संस्कृति और हरियाली का अद्भुत संगम |