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होली के रंग में भंग डालेगा चंद्रग्रहण! 3 मार्च को नहीं उड़ेगा गुलाल, जानिए क्या है असली वजह?

Chikheang 1 hour(s) ago views 653
  

चंद्रग्रहण



जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा पर पड़ रहे चंद्रग्रहण के कारण होली के पर्व की तिथियों में बदलाव किया गया है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार दो मार्च की रात भद्रा पुच्छ काल में होलिका दहन होगा, जबकि 3 मार्च को चंद्रग्रहण और सूतक काल रहने से रंगों की होली चार मार्च को मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्यों ने शास्त्र सम्मत मुहूर्त को देखते हुए यह स्पष्ट किया है कि दो मार्च को होलिका दहन होगा। तीन मार्च को सूतक व चंद्रग्रहण के कारण रंगों का उत्सव खेलना शुभ नहीं है। जिससे चार मार्च को ही होली का रंग खेला शुभ है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार पूर्णिमा तिथि दो मार्च को शाम 5:55 बजे से प्रारंभ होकर तीन मार्च की शाम 5:30 बजे तक रहेगी। शास्त्रों, विशेषकर ‘निर्णय सिंधु’ ग्रंथ के अनुसार भद्रा के पुच्छ काल में होलिका दहन करना शुभ माना गया है। इस वर्ष दो मार्च की रात 12:50 बजे से 2:02 बजे के बीच होलिका दहन का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा।

इसलिए धार्मिक दृष्टि से दो मार्च की मध्यरात्रि में ही होलिका दहन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि भद्रा के मुख काल में होलिका दहन वर्जित होता है, जबकि पुच्छ काल में यह मंगलकारी माना गया है। इसी कारण श्रद्धालुओं को निर्धारित समय में ही विधि-विधान से दहन करने की सलाह दी गई है। तीन मार्च, फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक चंद्रग्रहण रहेगा।
तीन मार्च को चंद्रग्रहण से नौ घंटे पहले लग जाएगा सूतक

ग्रहण से नौ घंटे पूर्व, सुबह 6:20 बजे से सूतक काल लग जाएगा। चंद्रोदय लगभग शाम 5:59 बजे होगा, लेकिन उससे पहले ही ग्रहण प्रारंभ हो चुका होगा। भारत में ग्रहण का मोक्ष काल ही स्पष्ट रूप से दिखाई देगा और चंद्रमा पृथ्वी की छाया के कारण कुछ धुंधला नजर आएगा।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ग्रहण और सूतक काल में शुभ कार्य वर्जित होते हैं। इसी कारण 3 मार्च को रंगों की होली नहीं खेली जाएगी। पूरे देश में 4 मार्च को धूमधाम से रंगोत्सव मनाया जाएगा। यह खग्रास चंद्रग्रहण एशिया, आस्ट्रेलिया, पैसिफिक द्वीपों तथा उत्तर और दक्षिण अमेरिका में दिखाई देगा।

भारत में विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, नगालैंड, मणिपुर और मिजोरम में इसका स्पष्ट प्रभाव दिखेगा। कोलकाता, गुवाहाटी, ईटानगर और आइजोल सहित दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, उत्तर प्रदेश और जयपुर में भी यह आंशिक रूप से नजर आएगा।




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