इसके पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक को सूचना देकर चली जाती थी टीम
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। कैंपियरगंज के भारीवैसी स्थित जटायू गिद्ध संरक्षण व प्रजनन केंद्र को पिछले दो वर्षों से नए गिद्ध नहीं मिल सके हैं। जबकि दोनों वर्ष रेस्क्यू टीम हजारों रुपये खर्च कर चित्रकूट व आसपास के जंगलों में पहुंची, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। इस बार भी टीम जनवरी में गई थी, 18 दिन में ही बिना गिद्ध पकड़े लौट आई। अब नए नियमों के तहत रेस्क्यू से पहले भारत सरकार के मंत्रालय से अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
लाल गर्दन वाले गिद्धों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से स्थापित इस केंद्र का शिलान्यास सात अक्टूबर 2020 को हुआ था। चार वर्ष बाद छह सितंबर 2024 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका लोकार्पण किया था। उद्घाटन के समय केंद्र में दो नर और आठ मादा गिद्ध थे। इसके बाद से टीम हर वर्ष दिसंबर अंत में चित्रकूट के जंगलों में रेस्क्यू के लिए डेरा डालती रही है, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस वर्ष 18 जनवरी को टीम चित्रकूट पहुंची थी, पर नए नियमों के तहत केंद्रीय अनुमति न होने के कारण तीन फरवरी को वापस लौट आई।
डीएफओ विकास यादव ने बताया कि अब गिद्ध पकड़ने से पहले भारत सरकार से अनुमति आवश्यक है। इसके लिए पत्राचार किया गया है। अनुमति मिलते ही टीम को पुनः रेस्क्यू के लिए भेजा जाएगा। इसके पूर्व रेस्क्यू के लिए जाने से पहले प्रधान मुख्य वन संरक्षक लखनऊ को सूचना देना होता था।
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20 वर्ष में 40 से 50 जोड़े बनाने का है लक्ष्य
वन विभाग और मुंबई नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) के सहयोग से गिद्ध संरक्षण व प्रजनन केंद्र संचालित हो रहा है। यहां पर विलुप्त हो रही लाल गर्दन वाले गिद्धों की संख्या बढ़ाना और उन्हें वापस प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने का काम होना है। शुरुआती दौर में इस केंद्र में तेजी से काम हुआ।
दो-तीन वर्ष के अंदर लाल गर्दन वाले गिद्धों को रेस्क्यू कर लाया गया। हालांकि सिर्फ दो नर गिद्ध को ही लाने में कामयाबी मिली। वन विभाग अनुसार 15 साल के इस प्रोजेक्ट में गिद्धों की संख्या बढ़ाकर प्रजनन के माध्यम से इसे 25-40 जोड़ों तक ले जाने का लक्ष्य है। लेकिन, तीन वर्ष में मुश्किल से दो जोड़े ही बन सके है। |
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