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MGM अस्‍पताल में 7000 जन्म प्रमाण पत्र अटके, झूठ बोलने वाले चार कर्मचारियों पर गिरी गाज

Chikheang 1 hour(s) ago views 349
  

एमजीएम का फाइल फोटो।


जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। महात्मा गांधी मेमोरियल (MGM) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और गलत रिपोर्टिंग का खुलासा हुआ है।   जिला उपायुक्त (DC) अनन्य मित्तल (सूचना: आपके स्रोत में कर्ण सत्यार्थी का जिक्र है, जो वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उपायुक्त हैं) की सख्ती के बाद अस्पताल प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए चार कर्मियों का वेतन अगले आदेश तक रोक दिया है।    जांच में सामने आया कि विभाग ने 96 प्रतिशत प्रमाण पत्र निर्गत करने का झूठा दावा किया था, जबकि हकीकत में वर्ष 2021 से 2025 तक की करीब 7,000 फाइलें धूल फांक रही थीं।

  
झूठे दावों की खुली पोल, ऐसे हुआ खुलासा लंबे समय से उपायुक्त कार्यालय को शिकायतें मिल रही थीं कि अभिभावकों को एक प्रमाण पत्र के लिए महीनों अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उपायुक्त के निर्देश पर जब अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. जुझार माझी ने विस्तृत समीक्षा की, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।   विभाग के पोर्टल पर बेहतर प्रदर्शन दिखाने के लिए लंबित मामलों को छिपाया गया और फर्जी आंकड़े पेश किए गए। इस गंभीर लापरवाही और डेटा से छेड़छाड़ को देखते हुए लिपिक जयराम महतो, सोमू सिंह, रविंद्र नाथ मांडी और जयराम मुर्मू पर गाज गिरी है।

  
बैकलॉग खत्म करने के लिए स्पेशल-11 की तैनाती

7 हजार लंबित फाइलों के बोझ को कम करने के लिए अस्पताल प्रशासन ने युद्ध स्तर पर विशेष अभियान शुरू किया है। इसके लिए 11 कर्मियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है:

  • नियमित कर्मचारी: पहले से तैनात चार लिपिक अब शाम 6 बजे तक रुककर बैकलॉग निपटाएंगे।  
  • अतिरिक्त बल: सेंट्रल रजिस्ट्रेशन शाखा के 5 आउटसोर्स कर्मी (रोमा मल्लिक, खुशबू कुमारी, संजीव शर्मा, सलोनी चौहान और अभिषेक लाहा) दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक केवल लंबित फाइलों पर काम करेंगे।  
  • निगरानी: कार्यालय लिपिक सुमित मिंज और जय कुमार को भी अतिरिक्त पाली में काम करने का निर्देश दिया गया है।


नई SOP लागू: अब सेम डे मिलेगा प्रमाण पत्र
भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए डॉ. जुझार माझी ने नई मानक कार्यप्रणाली (SOP) लागू कर दी है। अब अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों का प्रमाण पत्र उसी दिन (Same Day) तैयार कर अभिभावकों को सौंपने की व्यवस्था की गई है।    पुराने लंबित मामलों के लिए एक मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया गया है, जिसके तहत कर्मचारी खुद अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें प्रमाण पत्र उपलब्ध कराएंगे।
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