search

ठाणे में अंडाणु दान रैकेट का भंडाफोड़, गरीब महिलाओं को लालच देकर हो रहा था शोषण

LHC0088 1 hour(s) ago views 770
  

तस्वीर का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।  



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। महाराष्ट्र के ठाणे जिले में पुलिस ने अंडाणु दान से जुड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसमें करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की आशंका जताई जा रही है। पीड़ितों को हर मासिक चक्र के लिए 25 हजार से 30 हजार रुपये तक का लालच दिया जाता था और उन्हें बार-बार अंडाणु दान के लिए इस्तेमाल किया जाता था, जिससे उनका शारीरिक शोषण होता था।

अधिकारियों के अनुसार, महिलाओं को आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) केंद्रों में ले जाया जाता था, जहां सर्जरी के जरिये अंडाणु निकाले जाते थे और बाद में उन्हें लाखों रुपये में बेचा जाता था। आशंका है कि अब तक करीब 20 महिलाएं इस रैकेट की शिकार बनी हैं।
तीन महिलाएं गिरफ्तार

पुलिस अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि इस अवैध कारोबार के सिलसिले में तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह बदलापुर पूर्व के जोवेली इलाके में रिहायशी इमारत और एक सोनोग्राफी केंद्र से संचालित किया जा रहा था। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान सुलक्षणा गाडेकर, अश्विनी चबूकस्वर और मंजुषा वानखेड़े के रूप में हुई है।

पुलिस के अनुसार एक पीड़िता ने ठाणे की उप-जिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. ज्योत्स्ना सावंत को इस मामले की सूचना दी थी। इसके बाद हाल ही में सुलक्षणा के नैनो सिटी बिल्डिंग स्थित आवास पर छापेमारी की गई। आरोपितों के मोबाइल फोन से सोनोग्राफी रिपोर्ट, गर्भधारण में इस्तेमाल किए जाने वाले इंजेक्शनों की तस्वीरें, फर्जी नामों से बनाए गए हलफनामे, नकली दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन के साक्ष्य बरामद किए गए हैं।

उल्हासनगर के पुलिस उपायुक्त सचिन गोरे ने बताया कि 20 से अधिक महिलाएं इस रैकेट का शिकार हो सकती हैं। आईवीएफ केंद्रों, डाक्टरों और अस्पतालों की संलिप्तता की जांच कर रहे हैं। इस मामले में कई बड़े नामों के सामने आने की संभावना है। सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी कानून और भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इस तरह काम करता था रैकेट

  • आरोपितों ने गरीब को निशाना बनाया और उन्हें प्रति मासिक चक्र 25 हजार से 30 हजार रुपये का भुगतान किया।
  • पीड़ितों को अंडाणु उत्पादन बढ़ाने के लिए हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते थे और और सोनोग्राफी के लिए ले जाया जाता था।
  • अंडाणु तैयार होने के बाद पीड़ितों को आईवीएफ केंद्रों में भेजा जाता था, जहां अंडाणु को सर्जरी द्वारा निकाला जाता था और लाखों रुपये में बेचा जाता था।
  • पीड़ितों को बार-बार इस्तेमाल दानदाताओं के रूप में किया जाता था, जिससे उनका शारीरिक शोषण होता था।

क्यों किया जाता है अंडाणु दान

अंडाणु दान प्रजनन प्रक्रिया में महिला गर्भधारण के लिए किसी अन्य महिला या दंपती को अंडाणु देती है जिन्हें गर्भधारण में समस्या हो। उन महिलाओं को भी अंडाणु की जरूरत होती है जो अच्छी गुणवत्ता के अंडाणु नहीं बना सकतीं या उम्र अधिक हो गई हो या जेनेटिक समस्या हो।

अंडाणु दाता के अंडाणु से गर्भावस्था की संभावना बढ़ जाती है, क्योंकि दानादाता युवा और स्वस्थ होती हैं। यह प्रक्रिया को आमतौर पर आइवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) के माध्यम से किया जाता है। प्रक्रिया में अंडाणु दाता की जांच और हार्मोन उपचार किया जाता है, फिर अंडे निकाले जाते हैं और प्राप्तकर्ता के गर्भाशय में डाले जाते हैं।
भारत में यह है अंडाणु दान के नियम

भारत में सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी अधिनियम और सरोगेसी कानून 2021 के नियमों के तहत अंडाणु दान किए जा सकते हैं। केवल विवाहित महिला ही अंडाणु दान कर सकती हैं। यह केवल निस्वार्थ भाव से किया जा सकता है।

महिला केवल एक बार अंडाणु दान कर सकती है। अंडाणु दान करने वाली की उम्र 23 से 35 साल के बीच होनी होनी चाहिए। अंडाणु की बिक्री नहीं हो सकती।

यह भी पढ़ें: पुणे: शिवनेरी किले में शिवाजी जयंती पर बेकाबू भीड़, श्रद्धालु का पैर फिसलने से भगदड़ जैसे हालात; 3 घायल
like (0)
LHC0088Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
LHC0088

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1610K

Credits

Forum Veteran

Credits
164158