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श्रावस्ती में न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सभी थानाध्यक्ष को क्यों भेजा नोटिस? तीन दिन में मांगा स्पष्टीकरण

Chikheang 2025-12-12 22:07:14 views 1246
  



जागरण संवाददाता, श्रावस्ती। बिना किसी विधिक राय के न्यायालय पर आरोप पत्र भेजने को लेकर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। सिविल जज (अवर खंड) त्वरित न्यायालय/न्यायिक मजिस्ट्रेट दिलीप कुमार साहनी ने भिनगा कोतवाल समेत सभी थानाध्यक्षों को नोटिस भेजकर तीन दिन में स्पष्टीकरण तलब किया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

न्यायिक मजिस्ट्रेट ने भिनगा कोतवाल योगेश कुमार सिंह, इकौना थानाध्यक्ष परमानंद तिवारी, गिलौला थानाध्यक्ष आशीष कुमार वर्मा, सिरसिया थानाध्यक्ष शैलकांत उपाध्याय, नवीन मार्डन श्रावस्ती थानाध्यक्ष लाल साहब सिंह, मल्हीपुर थानाध्यक्ष अंकुर वर्मा, हरदत्तनगर गिरंट थानाध्यक्ष महिमा नाथ उपाध्याय, सोनवा थानाध्यक्ष विशुनदेव पांडेय व महिला थानाध्यक्ष पुष्पलता को शुक्रवार को नोटिस जारी किया है।

इसमें कहा गया है कि कार्यालय लिपिक की ओर से यह तथ्य संज्ञान में लाया गया है कि सभी आरोप पत्र न्यायालय पर बिना किसी विधिक राय के जमा किया जाता है। विवेचना के बाद विवेचक की ओर से अभियोजन कार्यालय से परीक्षण व विधिक राय लिए बिना ही न्यायालय में प्रेषित किए जा रहे हैं।

यह सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय व प्रदेश सरकार की ओर से जारी शासनादेश का घोर उल्लंघन है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि शासनादेश का पालन जान बूझकर नहीं किया जा रहा है। स्पष्टीकरण निर्धारित समय तक न मिलने पर विधिक कार्रवाई होगी। आदेश की एक-एक प्रति सीजेएम विनीत कुमार यादव व एसपी राहुल भाटी को सूचनार्थ भेजी गई है।
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