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20 की उम्र में सेना को दिया आसमान का 〹्षक✵स्टूडेंट्स ने बनाई चलती-फिरती लैब

deltin55 2026-1-29 11:56:58 views 1175


हैदराबाद बिट्स पिलानी हैदराबाद कैंपस के एक हॉस्टल रूम से शुरू हुर स्टार्टअप अपोलियन डायनेमिक्स ने भारत की ड्रोन युद्धक क्षमता बढ़ाई है। स्टार्टअप ने सेना के लिए चलती-फिरती मोबाइल ड्रोन लैब विकसित की, जो युद्ध के मोर्चे पर रहकर एक महीने में 100 से अधिक FPV ड्रोन तैयार कर सकती है। यह ड्रोन निगरानी और सामरिक ऑपरेशंस में अहम भूमिका निभाते हैं। महज 20 साल के दो छात्रों ने इसे 15-20 दिनों में तैयार कर सेना को सौंपा। लैब फिलहाल जम्मू में पूरी तरह ऑपरेशनल है और सेना को उपयोग व निर्माण का प्रशिक्षण भी दिया गया। यह यूनिट ट्रक के पीछे तैयार की गई है, जिसमें उडी प्रिंटर, असेंबल इकाइयां और ग्राउंड स्टेशन हैं। अब सेना ड्रोन असेबलिंग, मरम्मत और मिशन के लिए तुरंत तैयार रह सकती है।स्टार्टअप ने जम्मू के रेजिमेंट परिसर में एक ड्रोन लैब बनाने में सेना की मदद की है। यहां उपकरणों का भंडारण, असेंबलिंग प्रशिक्षण, रखरखाव सन्धान किया जाता है। अपोलियन के सीईओ जयंत खत्री के अनुसार, यह लैब यूनिट के साथ मिलकर मजबूत व्यवस्था बनाती है। सीटीओ शौर्य चौधरी कहते हैं, इससे ड्रोन निर्माण सीधे सैनिकों के हाथों में आता है, वे खुद असेंबल और मेंटेन करना सीखकर युद्ध की जरूरत के अनुसार बदलाव कर सकते हैं।सेना की ओर से भेजे गए प्रशंसा पत्र में कहा गया है कि लैब ने गुणवत्ता और प्रदर्शन के मानकों को पूरा किया है, जिससे FPV ड्रोन की असेबलिम् सोल्डरिंग और प्रोग्रामिंग संभव हो पाई। कंपनी की पेशेवर कार्यशैली, तकनीकी दक्षता और प्रतिबद्धता की सराहना की गई है।
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