अमेरिका और भारत ने शनिवार को अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनने की औपचारिक घोषणा कर दी है। इस समझौते के तहत अमेरिका भारत पर शुल्क घटाकर 50 फीसदी से 18 प्रतिशत कर देगा। बयान के अनुसार यह रूपरेखा 13 फरवरी, 2025 को राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए व्यापक अमेरिका-भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते की वार्ता के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को बताता है।

इस रूपरेखा में अतिरिक्त बाजार पहुंच संबंधी प्रतिबद्धताएं शामिल होंगी और यह अधिक मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं को समर्थन प्रदान करेगी। बयान में कहा गया है, अमेरिका और भारत के बीच अंतरिम समझौता हमारे देशों की साझेदारी में मील का पत्थर साबित होगा। यह पारस्परिक हितों और ठोस परिणामों पर आधारित द्विपक्षीय और संतुलित व्यापार के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

समझौते की प्रमुख शर्तों में भारत अमेरिका के सभी औद्योगिक सामानों और खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क समाप्त करेगा या कम करेगा। इनमें सूखे अनाज, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट तथा अन्य उत्पाद शामिल हैं। वहीं अमेरिका, भारत में उत्पादित वस्तुओं पर 18 प्रतिशत का शुल्क लगाएगा। इन वस्तुओं में वस्त्र और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबड़, जैविक रसायन, घरेलू सजावट का सामान, हस्तशिल्प उत्पाद और कुछ मशीनरी शामिल हैं। बयान में कहा गया है कि अमेरिका और भारत इस रूपरेखा को तुरंत लागू करेंगे और अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे ताकि सहमत रूपरेखा के अनुरूप पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते को पूरा किया जा सके।
इस व्यापार समझौते के तहत भारत कई अमेरिकी उत्पादों से ड्यूटी हटाने को तैयार हुआ है। इसमें अमेरिका के कृषि और खाद्य उत्पाद बड़े पैमाने पर शामिल हैं। इनमें ज्वार, सूखे डिस्टिलर ग्रेन, ताज़े और प्रोसेस्ड फल, मेवे, सोयाबीन का तेल और अल्कोहलिक ड्रिंक्स शामिल हैं।
अमेरिका के आदेश 14257 के तहत अब भारत पर 18 फीसदी का रेसिप्रोकल टैरिफ लगेगा। इसमें कपड़े, चमड़ा, जूते-चप्पल, प्लास्टिक, रबर, ऑर्गेनिक रसायन, सजावट का सामान, हस्तनिर्मित वस्तुएं और मशीनरी शामिल होगी।

कुछ ऐसे भी भारतीय उत्पाद होंगे जिनपर से अमेरिका पूरी तरह से शुल्क हटा लेगा।इनमें रत्न, हीरे, एयरक्राफ्ट के पार्ट. जनरिक दवाइयां शामिल हैं।

अमेरिका ने एयरक्राफ्ट और इसके कुछ हिस्सों के लिए एल्युमिनियम, स्टील और तांबे के आयात वाला सिस्टम ही लगा रखा था। इस समझौते के बाद अमेरिका इन सामग्रियों से शुल्क हटा लेगा।
भारत को US के नेशनल-सिक्योरिटी टैरिफ के तहत कुछ खास ऑटोमोटिव पार्ट्स के लिए टैरिफ-रेट में छूट मिलेगी, और सेक्शन 232 जांच पूरी होने के बाद दवाइयों के लिए संभावित बातचीत के के बाद ऐलान किए जाएंगे।
दोनों देश इस बात पर सहमत हुए हैं कि एक दूसरे के लिए फायदेमंद होने वाली मार्केट तक उसकी पहुंच सुनिश्चित की जाए।
भारत और अमेरिका इस बात पर भी सहमत हुए हैं कि कई क्षेत्रों में टैरिफ के अलावा भी ऐसी वजहें हैं जिनकी वजह से व्यापार प्रभावित होता है। इस तरह की बाधाओं को दूर किया जाएगा और आईसीटी लाइसेंसिंग वह अमेरिका के उत्पादों के मानकों में सुधार किया जाएगा।
दोनों देश इस बात पर सहमत हुए हैं कि अगर कोई भी टैरिफ में बदलाव करता है तो दूसरे को भी उसके हिसाब से अपने टैरिफ में बदलाव करने का हक होगा।
भारत और अमेरिका सप्लाई-चेन रेज़िलिएंस, इन्वेस्टमेंट स्क्रीनिंग, एक्सपोर्ट कंट्रोल और अन्य देशों की व्यापार नीतियों का मिलकर तालमेल के साथ मुकाबला करेंगे। दोनों देश GPU और डेटा-सेंटर हार्डवेयर सहित नई तकनीक में व्यापार और सहयोग को भी बढ़ाएंगे।
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