त्योहारों पर रंगीन मिठाइयों से रहें सावधान।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। दीपावली पर अधिक रंगों वाली मिठाई खाने से परहेज करें। अधिक रंग वाली मिठाई खाने से आप बीमार भी हो सकते हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग जांच में लगातार यह बात सामने आ रही है कि किस तरह खाने पीने खासकर मिठाइयों की गुणवत्ता से खिलवाड़ हो रही है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
एफएसएसएआई के मानकों को ताख पर रखकर घटिया खाद्य पदार्थों से मिठाईयां तैयार की जा रही हैं। काकोरी में राधे उद्योग के यहां पर इसी तरह रसायन मिलाकर मिठाइयां तैयार की जा रही थीं। वहां लिए गए बीस में से पांच सैंपल असुरक्षित श्रेणी में पाए गए जो सेहत के लिए बेहद घातक हैं।
अगर कोई लगातार इस तरह की मिठाई खाए तो उसे लीवर की गंभीर बीमारी हो सकती है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के सहायक आयुक्त विजय प्रताप सिंह के मुताबिक वैसे भी खाने पीने का सामान विश्वसनीय दुकानदार से ही खरीदें।
अगर कहीं अन्य जगह से ले रहे हैं तो यह जरूर देख लें कि मिठाई पर बहुत अधिक रंग तो नही है। अगर रंग लग रहा हो तो उसे गीली रुई से टच करें। अगर रंग होगा तो तत्काल उस पर नजर आ जाएगा।
एफएसडीए इस दौरान प्रतिष्ठानों में मानकों की जांच भी करेगा। मानक के अनुसार किचन में स्वच्छता और हाइजीन का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। खाना बनाने की जगह साफ-सुथरी होनी चाहिए। कर्मचारियों को स्वच्छ कपड़े पहनना चाहिए और हाथ धोने की पूरी सुविधा होनी चाहिए।
इसके अलावा प्रत्येक कर्मचारी की मेडिकल जांच कराना भी जरूरी होता है। अगर किसी कर्मचारी को किसी तरह का संक्रमण है तो उसे खाना बनाने और परोसने से रोका जाना चाहिए। रेस्टोरेंट में वेज और नानवेज को अलग अलग रखना चाहिए।
कच्चे और पके खाद्य पदार्थों का भंडारण भी इसी तरह होना चाहिए। रेफ्रिजरेशन का सही तापमान बनाए रखना जरूरी है ताकि चीजें खराब नहीं हों। बासी और एक्सपायरी डेट वाले उत्पादों का उपयोग सख्त वर्जित है। किसी भी हालत में किचन में नहीं रखी जानी चाहिए।
खाने की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए समय समय पर लैब से खाद्य पदार्थों की जांच कराना जरूरी है। कई रेस्टोरेंट और होटल वाले अक्सर लैब परीक्षण करवाते हैं। प्रत्येक लैब में इस तरह से परीक्षण कराने की सुविधा रखते हैं।
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