IIT कानपुर के साइबर सुरक्षा कमांड सेंटर ने तैयार किए 10,000 स्पेशलिस्ट।
अखिलेश तिवारी, कानपुर। जब दुनिया डिजिटल युग में प्रवेश कर चुकी है, तब युद्ध की परिभाषा भी बदल चुकी है। अब खतरे केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि सर्वर, नेटवर्क, ड्रोन और नियंत्रण प्रणालियों के भीतर छिपे हैं। ऐसे समय में भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी शिक्षा व्यवस्था और उससे निकले प्रशिक्षित युवा बनकर उभरे हैं। यही शिक्षित युवा आज साइबर सुरक्षा के मोर्चे पर राष्ट्र की ढाल बन रहे हैं और आत्मनिर्भर भारत की नींव को मजबूत कर रहे हैं।
इस दिशा में IIT कानपुर का साइबर सुरक्षा कमांड सेंटर (सी3आई) शिक्षा से राष्ट्र निर्माण का सशक्त उदाहरण बन चुका है। यहां ज्ञान केवल करियर नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा का माध्यम बन रहा है। गणतंत्र दिवस के इस विशेष अवसर पर सी3आई हब यह संदेश देता है कि शिक्षित युवा ही समृद्ध और सशक्त भारत की असली ताकत हैं।
जब शिक्षा राष्ट्र के संकल्प से जुड़ती है, तब प्रयोगशालाओं में तैयार हो रहे युवा केवल पेशेवर नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के साइबर प्रहरी बन जाते हैं। यही शिक्षा से उपजी आत्मनिर्भरता, भारत को आने वाले दशकों में सुरक्षित, समृद्ध और विश्वगुरु बनाने की दिशा में आगे ले जा रही है।
सी3आई हब में तैयार हो रही साइबर सुरक्षा की नई पीढ़ी यह प्रमाणित कर रही है कि जब शिक्षा को राष्ट्रहित से जोड़ा जाता है, तो आत्मनिर्भरता केवल नारा नहीं, बल्कि जीवंत सच्चाई बन जाती है। बीते पांच वर्षों में यहां साइबर सुरक्षा और ड्रोन सुरक्षा से जुड़े 50 से अधिक स्टार्टअप का जन्म हुआ है, वहीं 10,000 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाया गया है।
इनमें से लगभग 60 प्रतिशत युवा अपने उत्पादों और समाधानों के साथ बाजार में उतर चुके हैं और भारत की तकनीकी क्षमता को वैश्विक मंच पर स्थापित कर रहे हैं। यह वही युवा हैं, जो पहले विदेश में अवसर तलाशते थे, लेकिन अब देश में रहकर भारत की शक्ति बन रहे हैं।
यहां शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं है। सी3आई हब ने केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत उच्चाधिकारियों के लिए साइबर कमांडो फोर्स भी तैयार की है। अप्रैल 2025 में शुरू हुए पहले बैच में विभिन्न राज्यों की पुलिस और केंद्रीय पुलिस संगठनों के 36 अधिकारी शामिल हुए।
डिजिटल फोरेंसिक, एथिकल हैकिंग, ब्लाकचेन जांच और थ्रेट इंटेलिजेंस में पारंगत 5000 विशेषज्ञों की नई खेप तैयार हो रही है। भारतीय सेना के 70 से अधिक जवान भी आधुनिक साइबर युद्ध का प्रशिक्षण लेकर राष्ट्र सुरक्षा की डिजिटल सीमा पर तैनात हो चुके हैं।
सी3आई हब की स्थापना वर्ष 2020 में केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 170 करोड़ रुपये की लागत से की गई थी। इसका उद्देश्य देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे जैसे पावर ग्रिड, जल आपूर्ति प्रणालियों और रक्षा क्षेत्र को साइबर हमलों से सुरक्षित करना है।
शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में इसके प्रभावशाली परिणामों को देखते हुए वर्ष 2025 में इसे नेशनल टेक्नोलाजी ट्रांसलेशनल रिसर्च पार्क का दर्जा दिया गया। IIT कानपुर के वर्तमान निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल के नेतृत्व में यहां से सात से अधिक पेटेंट भी प्राप्त हो चुके हैं, जो देश की मौलिक तकनीकी क्षमता का प्रमाण हैं।
सिर्फ साफ्टवेयर नहीं, मशीनों की भी सुरक्षा
सी3आई हब की खासियत यह है कि यहां साइबर सुरक्षा को केवल साफ्टवेयर या डाटा तक सीमित नहीं रखा गया है। इसका फोकस साइबर फिजिकल सिस्टम पर है, जहां कंप्यूटर, नेटवर्क और भौतिक मशीनें एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं। ड्रोन और यूएवी सुरक्षा, बिजली और पानी जैसी क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रणालियों के कंट्रोल सिस्टम, ब्लाकचेन आधारित डाटा सुरक्षा, एआइ और एलएलएम की साइबर सुरक्षा तथा डिजिटल फोरेंसिक जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में यहां शिक्षा और अनुसंधान साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं।
यह वही शिक्षा है, जो राष्ट्र को भविष्य के खतरों से पहले ही सुरक्षित करने की क्षमता देती है। सी3आई हब आज केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि देश की डिजिटल संप्रभुता का प्रतीक बन चुका है। यहां ज्ञान को राष्ट्र रक्षा से जोड़ा जा रहा है और शिक्षा को रणनीतिक शक्ति में बदला जा रहा है।
सी3आई हब देश की डिजिटल संप्रभुता का प्रतीक बन चुका है। यहां भविष्य की साइबर लड़ाइयों की रणनीति तय हो रही है। इससे विदेश पर निर्भरता खत्म होगी और आत्मनिर्भरता आएगी। -प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल, IIT के निदेशक। |