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जेएनयू परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ व आधुनिक बनाने की तैयारी।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ व आधुनिक बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन अब 24 घंटे उच्चस्तरीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नई सुरक्षा एजेंसी की नियुक्ति करने जा रहा है। इसके लिए जेएनयू ने निविदा आमंत्रित की है। इसका उद्देश्य छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों, निवासियों और विश्वविद्यालय की संपत्ति की सुरक्षा को नई तकनीक और बेहतर निगरानी प्रणाली के माध्यम से मजबूत करना है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सुरक्षा एजेंसी को कुल 359 सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराने होंगे, जिनमें 126 महिलाएं शामिल होंगी। यानी महिला सुरक्षाकर्मियों की हिस्सेदारी करीब 35 प्रतिशत होगी। परिसर में तैनात कुल सुरक्षाकर्मियों की संख्या के अनुसार पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जाएगी, ताकि निगरानी और समन्वय बेहतर हो सके। इसके अलावा एक पद फायर सुपरवाइजर के लिए भी निर्धारित किया गया है।
कार्यक्रमों के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था
सुरक्षा एजेंसी को विश्वविद्यालय परिसर में गश्त, प्रवेश द्वारों पर नियंत्रण, अनधिकृत गतिविधियों की रोकथाम और नियमित निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। लावारिस या अवैध वाहनों को टो करके हटाना, अनधिकृत निर्माण, अतिक्रमण, तोड़फोड़ और पेड़ों या टहनियों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाओं पर नजर रखना और इसकी सूचना अधिकृत अधिकारियों को देना भी एजेंसी की जिम्मेदारी होगी। साथ ही विश्वविद्यालय में आयोजित सामाजिक, धार्मिक और आधिकारिक कार्यक्रमों के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था भी की जाएगी।
पेट्रोलिंग के लिए 24 घंटे सातों दिन क्यूआरटी वैन परिसर में चौबीसों घंटे पेट्रोलिंग के लिए क्यूआरटी वैन या एसयूवी तैनात की जाएगी, जो आधुनिक सुरक्षा उपकरणों से लैस होगी। वैन के चारों ओर रिकॉर्डिंग के लिए सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य होंगे। चयनित एजेंसी फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा भी प्रदान करेगी। प्रत्येक सुरक्षा पर्यवेक्षक के पास दोपहिया वाहन होना भी जरूरी किया गया है।
जीपीएस युक्त अल्ट्रा हाई फ्रीक्वेंसी (यूएचएफ) संचार उपकरण दिए जाएंगे
जीपीएस और यूएचएफ से लैस सुरक्षाकर्मी सभी सुरक्षाकर्मियों को जीपीएस युक्त अल्ट्रा हाई फ्रीक्वेंसी (यूएचएफ) संचार उपकरण दिए जाएंगे। केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से उनकी लोकेशन ट्रैक की जा सकेगी। इसके अलावा चोरी, आगजनी या अन्य आपात स्थितियों में नुकसान की जांच के लिए विशेषज्ञों की व्यवस्था भी सुरक्षा एजेंसी को करनी होगी। इस नई व्यवस्था से जेएनयू में सुरक्षा मानकों के और मजबूत होने की उम्मीद है।
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