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डेजर्ट नेशनल पार्क के DFO बृजमोहन गुप्ता ने बताया कि 16 मार्च को कृत्रिम गर्भाधान के बाद, राजस्थान के संरक्षण प्रजनन केंद्र में मादा टोनी द्वारा दिए गए अंडे से सीजन का 8वां ग्रेट इंडियन बस्टर्ड चूजा निकला, जो प्रोजेक्ट जीआईबी के लिए दूसरी कृत्रिम गर्भाधान सफलता को चिह्नित करता है। अब गोडावण ब्रीडिंग सेंटर में संख्या बढ़कर 52 हो चुकी है, जो किए जा रहे प्रयासों में एक सुखद संकेत है।
अबू धाबी से आया आइडिया DFO ने बताया- इंटरनेशनल फंड फॉर हुबारा कंजर्वेशन फाउंडेशन अबू धाबी (IFHC) में तिलोर पक्षी पर इस तरह का परीक्षण किया गया और वो सफल रहा। भारत के वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) के वैज्ञानिक भी वहां गए और इस तकनीक को सीखा। इसके बाद गोडावण पर इस तरह के परीक्षण के प्रयास शुरू किए।
8 महीने तक मेल गोडावण को दी ट्रेनिंग
इससे पहले जन्मे गोडावण के लिए रामदेवरा गोडावण ब्रीडिंग सेंटर में स्थित सुदा नामक मेल गोडावण को कृत्रिम मेटिंग के लिए ट्रेनिंग दी गई थी। उसके स्पर्म इकट्ठे किए गए थे। स्पर्म को सुदासरी स्थित ब्रीडिंग सेंटर ले जाया गया था जहां 20 सितंबर 2024 को टोनी नामक मादा गोडावण को कृत्रिम गर्भाधान करवाया गया। जिसके बाद एक गोडावण का जन्म हुआ था। अब शुक्रवार को इसी पद्धति से एक और गोडावण का जन्म होने से खुशी की लहर है।

आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन (एआई) पद्धति DFO गुप्ता ने बताया कि इस पद्धति को आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन (एआई) कहा जाता है। ये गोडावण पर किया गया पहला परीक्षण है। इस पद्धति में मेल गोडावण के सामने एक आर्टिफिशियल फीमेल बनाकर रखी जाती है। फिर उसे मेटिंग के लिए ट्रेनिंग दी जाती है ताकि वो स्पर्म दे सके, वो भी बिना मेटिंग के। इस तरह मेल को ट्रेनिंग देने में करीब 8 महीने लगे।
रामदेवरा ब्रीडिंग सेंटर से आई पहली खुशखबरी:नन्हे गोडावण ने लिया जन्म, अब संख्या बढ़कर हुई 51
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