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केदारनाथ में भी धरने पर बैठे थे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, अब प्रयागराज में माघ स्नान विवाद को लेकर चर्चा में

deltin33 3 hour(s) ago views 260
  

2023 में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने नहीं करने दिया था उन्हें मुख्य द्वार से मंदिर प्रवेश। फाइल  



संवाद सहयोगी, रुद्रप्रयाग। प्रयागराज में माघ स्नान विवाद को लेकर चर्चा में आए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का विवादों से नाता रहा है। वर्ष 2023 में केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के मौके पर श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की ओर से उन्हें मंदिर के मुख्य द्वार से दर्शन को नहीं जाने दिया गया था। इससे रुष्ट होकर वह धरने पर बैठ गए थे, लेकिन मंदिर समिति ने उनकी एक न सुनी और फिर समिति के बताये द्वार से ही वे मंदिर में दर्शन को गए।

कपाट खुलने के अवसर पर केदारनाथ में श्रद्धा, भक्ति और आस्था का संगम देखने को मिलता है, लेकिन वर्ष 2023 में इस मौके पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के दर्शन को लेकर भारी विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। कपाट खुलने पर परंपरा के अनुसार रावल भीमाशंकर लिंग, मंदिर समिति के पदाधिकारी व पुजारी वर्ग सबंसे पहले मंदिर में प्रविष्ट हुए। इसी क्रम में जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने अनुयायियों के साथ मुख्य द्वार से मंदिर के प्रवेश करने लगे तो मंदिर समिति ने उन्हें रोक दिया्र पीछे के दरवाजे से दर्शन करने को कहा गया।

इस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मुख्य द्वार से ही मंदिर में प्रवेश करने की जिद पर अड़ गए, लेकिन मंदिर समिति ने इसकी अनुमति नहीं दी। इससे रुष्ट स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मंदिर परिसर में ही विरोध दर्ज कराया। उन्होंने पहले मुख्य द्वार के समीप धरना दिया और फिर आदि शंकराचार्य के समाधि स्थल में धरने पर बैठ गए। हालांकि, समिति ने फिर भी उन्हें मुख्य द्वार से प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई, जिस कारण उन्हें वीआइपी गेट से ही दर्शन करने पड़े।

इस संबंध में मंदिर समिति के तत्कालीन अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने बताया कि वर्ष 2023 में कपाट खुलने के मौके पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आम श्रद्धालुओं की तरह मुख्य द्वार से अपने अनुयायियों के साथ मंदिर में प्रवेश करने की जिद की थी, जबकि नियमानुसार उन्हें निर्धारित गेट से ही जाना था। अजेंद्र ने स्पष्ट किया कि मंदिर समिति ने नियमों के तहत ही कार्य किया और बाद में उसी गेट से उनके दर्शन संपन्न कराए गए।

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