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एनएलयू छात्रा आत्महत्या मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा-ऐसी घटनाओं पर गंभीरता से ध्यान जरूरी; UGC से मांगी जानकारी

Chikheang 3 hour(s) ago views 544
  

छात्रा की आत्महत्या मामले पर चिंता व्यक्त करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाओं को गंभीरता से देखा जाना चाहिए। प्रतीकात्मक तस्वीर



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) की छात्रा की आत्महत्या मामले पर चिंता व्यक्त करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाओं को गंभीरता से देखा जाना चाहिए। न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव व न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने टिप्पणी की कि माता-पिता ने अंततः अपनी बेटी को खो दिया है। हम सभी इससे चिंतित हैं। यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर वास्तव में ध्यान देने की आवश्यकता है।

अदालत ने कहा कि 2025 में एमिटी विश्वविद्यालय के छात्र सुशांत रोहिल्ला की आत्महत्या से संबंधित मामले में दिया गया फैसला भी वर्तमान मामले से संबंधित है। कोर्ट ने ऐसे मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशानिर्देश का पालन करने के संबंध में उठाये गए कदमों के संबंध में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को जानकारी पेश करने का निर्देश दिया। मामले में अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी।

सितंबर 2024 में एनएलयू के दिल्ली परिसर में तीन छात्रों ने आत्महत्या कर ली थी। इनमें एक छात्रा भी थी, जिसके माता-पिता की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने उक्त टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि सुशांत के मामले में इस कोर्ट द्वारा पहले ही एक फैसला दिया जा चुका है, जिसमें कुछ हद तक इस पर विचार किया गया है। अब हम इस मामले के हिसाब से उपाय देखेंगे।

याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव ने पीठ को बताया कि परिवार यूनिवर्सिटी से उन परिस्थितियों के बारे में जवाब चाहता है जिनके कारण उनकी बेटी की मौत हुई होगी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि माता-पिता को इस मामले को खत्म करना है, लेकिन उन्हें अब तक यह नहीं पता है कि यूनिवर्सिटी ने यह जानने के लिए क्या किया कि उनकी बेटी की मौत उनकी देखरेख में क्यों हुई। वे जानना चाहते हैं कि क्या यूनिवर्सिटी की इस घटना पर कोई राय है।

राजशेखर राव ने कहा कि तीन छात्र कुछ दिनों के अंतराल में अपनी जान दे देते हैं। विश्वविद्यालय में दाखिले के कुछ हफ्तों या दिनों के भीतर ऐसा हुआ। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि छात्रा के स्वजन अपनी बेटी के हास्टल के कमरे को खाली करने से पहले अपने सवालों का कुछ समाधान चाहते हैं। यह भी कहा कि अब तक स्वजन को मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं दिया गया है।

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