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दुनिया के सबसे घातक फाइटर जेट में लगा देसी दिल, ग्रीस के राफेल को 〷क इन इंडिया✩े बनाया और ताकतवर, स्ट्रैटेजिक मास्टरस्ट्रोक!

deltin55 4 hour(s) ago views 6


एथेंस: भारतीय टेक्नोलॉजी अब यूरोप के आसमान में परचम लहराएगी। ग्रीस के राफेल लड़ाकू विमानों में भारतीय टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा, वो भी चुपचाप, बिना किसी बड़े ऐलान के। यह 〷क इन इंडिया✩ाकत का अहसास है, जिसपर हर भारतीय को गर्व होगा। मेक इन इंडिया अब भारत को एक रक्षा बाजार से रक्षा साझेदार की भूमिका में ला रही है। भारत, जो अभी तक फ्रांस से राफेल फाइटर जेट खरीद रहा था, अब वही भारत फ्रांसीसी एयरक्राफ्ट को अपग्रेड कर रहा है। ग्रीस की डील एक संकेत है कि भारत अब सिर्फ टेक्नोलॉजी लेता नहीं, बल्कि देता भी है, और वो भी दुनिया के सबसे आधुनिक फाइटर जेट्स को।भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग के बीच रिपोर्ट है कि ग्रीस को हाल ही में आपूर्ति किए गए डसॉल्ट एविएशन राफेल लड़ाकू विमानों में भारतीय टेक्नोलॉजिकल कंपोनेंट्स का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, डसॉल्ट या भारतीय रक्षा मंत्रालय ने इस बारे में आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन द संडे गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक यह डेवलपमेंट भारत के वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं में बढ़ती भागीदारी और डिफेंस एक्सपोर्टर बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।फ्रांसीसी राफेल फाइटर में देसी टेक्नोलॉजीद संडे गार्जियन के मुताबिक फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट की भारतीय साझेदार कंपनी, नागपुर स्थित डसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (DRAL), पहले से ही फाल्कन बिजनेस जेट्स के लिए कॉकपिट कैनोपी और दरवाजे जैसे कंपोनेंट्स का उत्पादन करती है और राफेल के कई पार्ट्स के उत्पादन की योजना बना रही है। इसके अलावा, नोएडा में एक मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधा स्थापित की गई है, जो भारत के राफेल और मिराज फाइटर जेट्स के लिए कंपोनेंट्स और अन्य उत्पादन में मदद करेगी। कंपनी के दस्तावेजों के मुताबिक, ग्रीस ने फ्रांस से 24 राफेल जेट खरीदे हैं, जिनमें से 18 की आपूर्ति 2021 और 2023 के बीच की गई है और बाकी 6 फाइटर जेट्स की आपूर्ति 31 दिसंबर 2024 तक तनाग्रा एयर बेस पर पूरी हो गई है।भारतीय रक्षा सार्वजनिक उपक्रम, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने राफेल के RBE2 रडार के लिए 7,000वें ट्रांसमिट/रिसीव मॉड्यूल का उत्पादन और थेल्स को आपूर्ति की है, जो 〷क इन इंडिया✩हल के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ग्रीक वायुसेना को मिले फ्रांसीसी राफेल लड़ाकू विमानों में भारत में बनी कुछ महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी और सिस्टम लगे हैं। इन सिस्टम्स में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, केबल हार्नेस, एवियोनिक्स माउंटिंग और कुछ टेलीमेट्री सिस्टम शामिल हैं जो भारत की निजी और सार्वजनिक रक्षा कंपनियों ने विकसित किए हैं। इसे एक शानदार उपलब्धि कहा जा सकता है। यह पहली बार नहीं है जब भारत में बनी डिफेंस टेक्नोलॉजी किसी और देश की वायुसेना के लिए इस्तेमाल की गई हो, लेकिन ग्रीस जैसे यूरोपीय देश के आधुनिक फाइटर जेट्स में इसका इस्तेमाल एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।राफेल से बन गया है भारत का खास रिश्ताआपको बता दें कि भारत और फ्रांस के बीच राफेल को लेकर 2016 में डील की गई थी, जिसके तहत भारत ने फ्रांस से 36 राफेल फाइटर जेट्स खरीदे थे। इस डील में भारत की कंपनियों को ऑफसेट प्रावधानों के तहत कई उत्पादन और सप्लाई प्रोजेक्ट्स में शामिल किया गया था। इसी मॉडल के तहत भारत में बनी तकनीकों का निर्यात शुरू हुआ है। Dassault Aviation, जो राफेल फाइटर जेट्स बनाती है, उसने भारत की कंपनियों के साथ साझेदारी करके कई कंपोनेंट्स का निर्माण भारत में ही किया और उन्हें फ्रांस को निर्यात किया। यही कंपोनेंट्स अब ग्रीस, मिस्र और UAE जैसे देशों के राफेल जेट्स में भी लगे हैं।भारत की कई प्रमुख कंपनियां — जैसे कि Bharat Electronics Limited (BEL), Hindustan Aeronautics Limited (HAL), Tata Advanced Systems, और L&T Defence अब राफेल फाइटर जेट के ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बन चुकी हैं। इन कंपनियों ने न सिर्फ टेक्नोलॉजिकल स्टैंडर्ड को पूरा किया है, बल्कि समय पर डिलीवरी और लागत नियंत्रण में भी अपनी क्षमता साबित की है। Tata Group और Dassault Aviation की जॉइंट वेंचर कंपनी Dassault Reliance Aerospace Ltd. (DRAL) नागपुर में फाइटर जेट्स के कुछ ढांचे और सब-सिस्टम्स बना रही है, जिन्हें अब एक्सपोर्ट किया जा रहा है।यूरोपीय संघ के डिफेंस सेक्टर में भारत की यह एंट्री बड़ी रणनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है। यूरोप में डिफेंस टेक्नोलॉजी के स्टैंडर्ड बहुत सख्त होते हैं, और वहां की सेनाएं आम तौर पर अपने ही देशों या अमेरिका से तकनीक लेना पंसद करती हैं, ऐसे में भारत की तकनीक का वहां अपनाना, एक भरोसेमंद सप्लायर के तौर पर भारत की प्रतिष्ठा को और मजबूत करता है। इससे आने वाले वर्षों में भारत के लिए और अधिक निर्यात के मौके खुल सकते हैं।
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