नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित दान अनियमितता प्रकरण पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। नागपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि इस विषय पर संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले पहले ही विस्तृत बयान जारी कर चुके हैं और वही संघ का आधिकारिक पक्ष है। भागवत ने अलग से टिप्पणी करने के बजाय कहा कि इस मामले में होसबाले के बयान को ही देखा जाना चाहिए। संघ ने इस पूरे प्रकरण को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया है।
होसबाले ने जताई चिंता
संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने अपने बयान में कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और मंदिर से जुड़ी किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता अत्यंत गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि मंदिर का निर्माण लंबे संघर्ष, त्याग और समाज के सहयोग से संभव हुआ है, इसलिए श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
जांच की वर्तमान स्थिति
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राम जन्मभूमि ट्रस्ट की ओर से शिकायत मिलने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। एसआईटी ने प्रारंभिक जांच के बाद 25 जून को मामला दर्ज किया। जांच एजेंसियों ने अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया है और पूछताछ जारी है। साथ ही जांच के दायरे को विस्तृत करने के लिए एसआईटी को अतिरिक्त समय भी दिया गया है। इस बीच, नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा भी दिया है। मामले की अंतिम सच्चाई जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
श्रद्धालुओं से संयम की अपील
संघ ने अपने बयान में लोगों से अपील की है कि वे जांच पूरी होने तक संयम बनाए रखें और किसी भी प्रकार की अफवाह या अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें। संगठन ने कहा कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में समाज को शांति और जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना या तनाव की स्थिति पैदा न हो।
मानसिक स्वास्थ्य पर भी बोले मोहन भागवत
राम मंदिर प्रकरण पर प्रतिक्रिया देने के अलावा मोहन भागवत नागपुर में आयोजित 'सन्मार्ग माइंड वेलनेस' केंद्र के उद्घाटन समारोह में भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अत्यधिक मोबाइल और स्क्रीन के उपयोग, परिवारों में संवाद की कमी तथा संयुक्त परिवारों के घटते चलन का असर बच्चों के मानसिक विकास पर पड़ रहा है। उनके अनुसार, कई बच्चे छोटी-छोटी असफलताओं का सामना करने में भी कठिनाई महसूस कर रहे हैं।
परिवार और समाज की भूमिका पर दिया जोर
भागवत ने कहा कि बच्चों को केवल तकनीक के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने माता-पिता से आग्रह किया कि वे बच्चों के साथ अधिक समय बिताएं और उन्हें संवाद, संस्कार तथा जीवन के अनुभवों से जोड़ें। उन्होंने कहा कि पहले दादा-दादी और नाना-नानी की कहानियां बच्चों को धैर्य, संघर्ष और जीवन मूल्यों की सीख देती थीं, लेकिन आज यह परंपरा तेजी से कम होती जा रही है। उनका मानना है कि मानसिक रूप से मजबूत समाज बनाने के लिए परिवार, विद्यालय और सामाजिक संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा।
भारतीय ज्ञान परंपरा को अपनाने का सुझाव
अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा का भी उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने योग वशिष्ठ और पतंजलि योग सूत्र जैसे भारतीय ग्रंथों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके सिद्धांतों का आधुनिक मनोविज्ञान के साथ समन्वय कर एक व्यापक भारतीय दृष्टिकोण विकसित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य केवल चिकित्सा का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारी भी है। समाज के सभी वर्गों को मिलकर ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जहां बच्चे और युवा खुलकर अपनी समस्याएं साझा कर सकें और समय पर उचित सहयोग प्राप्त कर सकें।

Editorial Team
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