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3 बड़ी बातें हैं-

1. प्रधानमंत्री की 7 अपीलें
10 मई को तेलंगाना के सिकंदराबाद की रैली में कहा- कोरोना सदी का सबसे बड़ा संकट था, तो अमेरिका-ईरान जंग से बने हालात इस दशक के बड़े संकटों में से एक है। इससे निपटने के लिए देशवासियों से 7 अपील की। कुछ देर बाद ही बीजेपी ने सोशल प्लेटफॉर्म पर ये पोस्टर भी जारी कर दिया-
पश्चिम एशिया की जंग 27 फरवरी को शुरू हुई थी। सरकार कहती रही सब ठीक है। लेकिन ढाई महीने बाद प्रधानमंत्री सबसे अपील कर रहे हैं।
2. वित्त मंत्रालय ने कहा- ‘महंगे तेल का बोझ टाल नहीं सकते’
3. सोने-चांदी पर अचानक इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाना
मौजूदा हालात में 3 ऐसी बातें हैं जो लोगों के लिए संकट पैदा करेंगी…
1. पेट्रोल-डीजल 17 रुपए तक महंगा हो सकता है
इन तीनों कंपनियों की नेट वर्थ अभी 3.48 लाख करोड़ रुपए है। अगर यही घाटा जारी रहा, तो सिर्फ दो और तिमाही यानी 6 महीने में इनकी नेटवर्थ शून्य हो सकती है। सीधे शब्दों में कंपनियां कागज पर दिवालिया हो जाएंगी। इसलिए पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ने की चर्चा है।
अब सवाल आता है कितना? मोटा-मोटी कैलकुलेशन है कि कंपनियों को अपना घाटा पूरा करने के लिए पेट्रोल पर 16 रुपए और डीजल 17 रुपए बढ़ाने की जरूरत है। हिसाब नीचे ग्राफिक में देख लीजिए-
बीते दो महीने में कच्चे तेल के दाम बढ़ने के चलते 120 से ज्यादा देशों में दाम बढ़ाए जा चुके हैं। पाकिस्तान में 44%, अमेरिका में 42% और चीन में 31%।
2. महंगाई दर बढ़ने से आपका मंथली बजट 15% बढ़ सकता है

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में 15% की बढ़ोतरी होने पर महंगाई दर में 1% की सीधी बढ़ोत्तरी होती है। मार्च में थोक महंगाई दर 3.8% थी, जो अप्रैल में बढ़कर 8.3% हो गई। हालांकि अभी खुदरा महंगाई 3.48% पर नियंत्रण में है, क्योंकि सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए हैं। कीमतें बढ़ने और मानसून कमजोर होने से इसमें भी बढ़ोतरी होगी। सुनने में ये एक आंकड़ा है, लेकिन असल जिंदगी में इसके असर काफी गहरे हैं।

मान लीजिए कि पेट्रोल-डीजल के दाम ₹15 प्रति लीटर बढ़ जाते हैं, तो एक मिडिल क्लास फैमिली का बजट कुछ ऐसे बिगड़ेगा-
इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में काम कर रहे लोगों की नौकरी का संकट होगा। ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन ऑर्गेनाइजेशन 'ऑल इंडियन मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के मेंबर शैलेंद्र गुप्ता के मुताबिक, पहले से पेट्रोल-डीजल के संकट की वजह से 10% गाड़ियां नहीं चल रही हैं। अगर तेल की कीमत बढ़ी तो 30% गाड़ियां नहीं चल पाएंगी।’
3. जून-जुलाई में 39 मिलियन टन खाद की जरूरत, स्टॉक में सिर्फ आधा
सरकार का दावा है कि उसने तेल, गैस और खाद का जरूरी स्टॉक कर रखा है…
60 दिन के लिए कच्चे तेल का स्टॉक मौजूद: भारत के पास विशाखापट्टनम, मंगलुरु और पादुर के स्टोरेज प्लांट में 5.53 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) कच्चा तेल रखने की कैपिसिटी है। इनमें अभी 64% यानी लगभग 3.37 MMT कच्चा तेल भरा है। हरदीप पुरी के मुताबिक, भारत के पास 60 दिन के कच्चा तेल का स्टॉक मौजूद है।
LPG का प्रोडक्शन डेढ़ गुना तक बढ़ा: भारत ने अपनी जामनगर, पानीपत, मथुरा और गुवाहाटी समेत कुल 23 गैस-तेल रिफाइनरियों में LPG का प्रोडक्शन बढ़ाया है। पुरी के मुताबिक, ‘पहले हमारा घरेलू LPG उत्पादन रोजाना 35 से 36 हजार मीट्रिक टन था, जिसे हमने बढ़ाकर 50 से 54 हजार मीट्रिक टन तक पहुंचा दिया है।’
खाद का स्टॉक आम दिनों से ज्यादा: फर्टिलाइजर विभाग की एडिशनल सेक्रेटरी अपर्णा शर्मा के मुताबिक, 'यूरिया प्लांट पूरी कैपिसिटी से चल रहे हैं और फॉस्फेट व पोटाश वाली खाद का प्रोडक्शन भी बढ़ाया गया है। अभी सरकार के पास 51% स्टॉक है, जबकि आमतौर पर इस समय सिर्फ 33% स्टॉक रहता है। खाद सब्सिडी के लिए बजट में 1.70 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा दिए गए हैं, ताकि खाद के दाम बढ़ने पर भी किसानों पर बोझ न बढ़े।’
इसके अलावा दुनिया में जंग के हालात के दौरान भी भारत की अर्थव्यवस्था की असली ताकत उसकी घरेलू मांग में है। देश की GDP का करीब 70% हिस्सा घरेलू खपत से आता है, इससे इकॉनमी पर बाहरी दबावों का असर कम पड़ता है।
एक्सपर्ट्स ने युद्ध के चलते भारत की GDP ग्रोथ 7.7% से घटकर 6.7% तक आने की संभावना जताई है, फिर भी ये ज्यादातर देशों के मुकाबले तेज ग्रोथ होगी।
टैक्स और ऑडिट फर्म ‘डेलॉइट’ के मुताबिक, भारत ने अपनी सबसे बड़ी ताकत घरेलू मांग पर ध्यान दिया है, जिससे महंगाई कंट्रोल में रही और खपत को बढ़ावा मिला है।
पेट्रोल-डीजल, LPG, कुकिंग ऑयल और फर्टिलाइजर जैसी जरूरी चीजों के दाम बढ़ाना या घटाना सरकार के हाथ में है। आप पर उसका असर कम हो, इसकी तैयारी जरूर कर सकते हैं। फाइनेंशियल प्लानर स्वाती कुमारी बताती हैं-
इमरजेंसी फंड बढ़ाइए: ज्यादा बचत इमरजेंसी के खर्चों और महंगाई के समय सुरक्षा देती है। अगर इस समय आपके इमरजेंसी फंड में 5 लाख रुपए हैं, तो आप इसे 7-8 लाख के बीच कर लीजिए। उदाहरण के तौर पर, जिस परिवार का मासिक खर्च 50 हजार है, तो उसे कम से कम 3 लाख रुपए का इमरजेंसी फंड बनाना चाहिए।
बड़े खर्च रोक दीजिए: खर्च बढ़ेगा और कमाई नहीं बढ़ेगी, तो सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा। ऐसे में अगर आप अपनी कार अपडेट करना चाहते हैं या फिर विदेश यात्रा का प्लान हैं, तो इसे कम से कम एक साल के लिए टाल दीजिए।
हेल्थ इश्योरेंस कवर बढ़ा लीजिए: संकट के समय में अगर कोई हेल्थ इमरजेंसी आती है, तो सेविंग कम होने और मेडिकल खर्च बढ़ने की कंडीशन में आप अपनी FD या फिर दूसरे इन्वेस्टमेंट्स से पैसा निकालना चाहेंगे, जो सही डिसिजन नहीं होगा। ऐसे में अगर गुंजाइश हो, तो अपना हेल्थ इंश्योरेंस कवर बढ़ा लें।
इन सेक्टर्स में बढ़ाएं निवेश: कोविड के समय में फार्मा और IT जैसे सेक्टर्स के शेयर बढ़े थे। मौजूदा संकट में भी कुछ सेक्टर्स मुनाफा दे सकते हैं। अगर आपके पास एक्स्ट्रा पैसा है, तो आप रिन्यूएबल एनर्जी, EV और रेलवे जैसे सेक्टर्स में इन्वेस्ट कर सकते हैं।
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रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास

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