भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के बैनर तले देश के विभिन्न राज्यों से आए किसानों ने मंगलवार (23 जून) को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया. किसानों ने सरकार से इस समझौते को आगे न बढ़ाने की मांग की और कहा कि इससे भारतीय कृषि और किसानों की आजीविका पर बुरा असर पड़ सकता है.
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा, ''देश में कई अहम मुद्दे हैं, लेकिन आज किसान भारत-अमेरिका ट्रेड डील के मुद्दे पर अपनी चिंता जाहिर करने के लिए एकजुट हुए हैं. यह समझौता किसानों के भविष्य से जुड़ा हुआ है.''

जगजीत सिंह डल्लेवाल ने आगे कहा कि सरकार कह रही है कि इस समझौते से किसानों को कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन किसानों को डर है कि अगर बड़ी मात्रा में कृषि उत्पाद विदेशों से भारत आए तो घरेलू किसानों की फसल और उपज प्रभावित होगी.
उन्होंने कहा, ''सरकार पहले आत्मनिर्भर भारत और विदेशी सामान पर निर्भरता कम करने की बात करती रही है. ऐसे में अगर अमेरिकी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोला जाता है तो इसका लाभ अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मिलेगा, जबकि भारतीय किसान नुकसान झेलेंगे.''


किसान नेता ने ये भी कहा कि अगर अमेरिका से सस्ता सोयाबीन तेल भारत आएगा तो देश के तिलहन उत्पादक किसानों की उपज कौन खरीदेगा? इसी तरह अगर मक्का और उससे जुड़े उत्पाद विदेशों से आने लगे तो भारतीय मक्का की मांग भी प्रभावित हो सकती है.

डल्लेवाल ने कहा कि यह केवल एक व्यापार समझौता नहीं, बल्कि देश के किसानों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल है। इसलिए किसान इस मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं।
डल्लेवाल ने कहा कि देश का किसान पीछे हटने वाला नहीं है. उन्होंने कहा, ''सरकार को किसानों की चिंता को गंभीरता से लेना चाहिए. अगर पूरे देश के किसान एकजुट होकर आंदोलन में उतरते हैं तो स्थिति बड़ी गंभीर हो सकती है.
|