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एक ही हादसे में बुझ गए दो घरों के इकलौते चिराग, जिंदगी साथ-साथ और मौत भी ले गई एक साथ

Chikheang 2025-10-15 04:36:54 views 840
  



जागरण संवाददाता, एटा। ये दो दोस्तों की कहानी है। बचपन का साथ था और जवानी भी साथ आई। जिंदगी की करवटें भी एक जैसी रहीं। पिता का साया भी उठा और सात फेरों की कसमें खाने वाली पत्नियां भी छोड़कर चलीं गईं। रिश्तों के नाम पर दोनों की दोस्ती थी और परिवार के नाम पर सिर्फ मां। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

साथ रहने वाले इन दो दोस्तों को सोमवार रात जब मौत आई तो वो भी दोनों को साथ ही ले गई। बाइपास के किनारे साथ टहलते समय मौत की रफ्तार से आया वाहन कुचल कर चला गया। अपने-अपने घर के इकलौते चिराग एक साथ बुझ गए। दोनों घरों में बिलखने वालीं उनकी सिर्फ मां ही बची हैं। हादसे में दो दोस्तों की मौत ने बस्ती को गमगीन कर दिया है।

मुहल्ला गोविंददास निवासी 32 वर्षीय आशीष और विपिन की दोस्ती थी। दोनों अपने-अपने घर के इकलौते बेटे थे। जवान हुए तो विपिन ने परचून की दुकान संभाली और आशीष प्राइवेट नौकरी करने लगे। एक दूसरे की शादी में दोनों जमकर नाचे, लेकिन बाद में दोनों की पत्नियां रूठकर मायके चलीं गई।

दोनों के सिर से पिता का साया तीन साल के अंतराल से उठा था। पांच साल पहले आशीष के पिता बीमारी से पांच साल पहले चल बसे तो तीन साल बाद विपिन के पिता को बीमारी निगल गई।

दोनों की बहनों की शादी हो चुकी थी। सोमवार रात खाना खाने के बाद विपिन और आशीष एक साथ टहलने के लिए निकले थे।

रात साढ़े 10 बजे एक वाहन ने उन्हें कुचल दिया। हादसे की सूचना पर जुड़ी भीड़ ने पुलिस के साथ दोनों घायलों को स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पड़ोसियों ने बताया कि बचपन के दोस्त आशीष और विपिन अपने माता पिता के इकलौते बेटे थे। अब उनके घर में परिवार के नाम पर दोनों की मां रह गई हैं, जिनके सहारे एक साथ छिन गए।
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