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ट्रंप ने रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध, यूक्रेन युद्ध को बताया वजह; भारत समेत दुनिया पर क्या पड़ेगा असर

LHC0088 2025-10-23 15:06:42 views 1244
  



नई दिल्ली।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US Sanctions Russian Oil Companies) की लीडरशिप वाले एडमिनिस्ट्रेशन ने बुधवार को रूस की दो सबसे बड़ी तेल प्रोड्यूसर कंपनियों, रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगा दिए। यूएस के प्रतिबंधों से रूस पर यूक्रेन में अपनी लड़ाई खत्म करने का दबाव बढ़ गया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

यह कदम मॉस्को के खिलाफ वाशिंगटन के अब तक के सबसे बड़े प्रतिबंधों में से एक माना जा रहा है, जिसकी घोषणा ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के व्लादिमीर पुतिन पर US प्रेसिडेंट के साथ बातचीत में “ईमानदारी से” शामिल न होने का आरोप लगाने के बाद की गई थी। इस प्रतिबंध का भारत समेत बाकी दुनिया पर क्या असर पड़ेगा, आइए जानते हैं।

  
तेल के दाम उछले

रूस की दो सबसे बड़ी क्रूड कंपनियों पर ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के नए प्रतिबंधों के बाद बुधवार शाम को तेल की कीमतों में लगभग 3% की बढ़ोतरी हुई। तेल के दाम बढ़ना भारत समेत बाकी दुनिया के लिए अच्छा नहीं है, क्योंकि इससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है।

रूस की चेतावनी



अमेरिकी प्रतिबंधों पर रूस ने चेतावनी दी है। रूस ने खुद कहा है कि इन प्रतिबंधों से विकासशील देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ेगा। इस ऊर्जा सुरक्षा में तेल और गैस दोनों शामिल हैं।
भारत रूस से सस्ता तेल खरीद रहा है, अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद इसमें कमी आ सकती है।  
तेल सप्लाई पर असर

यूएस के रूस की सबसे बड़ी तेल कंपनियों पर नए प्रतिबंधों का सीधा मकसद क्रेमलिन की युद्ध से होने वाली कमाई को रोकना है। पर इस कदम से रूसी तेल का फिजिकल फ्लो कम हो सकता है और खरीदारों को वॉल्यूम को ओपन मार्केट में री-रूट करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इसका असर सप्लाई पर पड़ेगा।
रोसनेफ्ट की सब्सिडियरी भारत में चलाती है पेट्रोल पंप

जिन दो रूसी कंपनियों पर यूएस ने प्रतिबंध लगाएं है, उनमें से रोसनेफ्ट “नायरा एनर्जी“ की पैरेंट कंपनी है, जिसके पास भारत में पेट्रोल पंपों का सबसे बड़ा प्राइवेट नेटवर्क है। इसके पास भारत में 6,500 से ज्यादा स्टेशन हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों का नायरा पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि नायरा भारत की दूसरी सबसे बड़ी निजी रिफाइनरी (वादिनार, गुजरात में 20 मिलियन टन सालाना क्षमता) ऑपरेट करती है।

रोसनेफ्ट के पास नायरा का मालिकाना हक होने के कारण कई चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
सीधे सप्लाई नहीं आ पाएगी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत की सरकारी रिफाइनर कंपनियों के अनुसार वे रूस से तेल बैरल खरीदने का रिव्यू कर रही हैं ताकि यह पक्का हो सके कि अमेरिका द्वारा उन पर बैन लगाए जाने के बाद रोसनेफ्ट और लुकोइल से सीधे कोई सप्लाई नहीं आए।
अब तक क्या रहा असर

एनालिस्ट्स के अनुसार पिछले 3.5 सालों में रूस पर लगे लगभग सभी प्रतिबंध देश के प्रोडक्शन वॉल्यूम या तेल से होने वाले रेवेन्यू पर खास असर डालने में नाकाम रहे हैं। वहीं भारत और चीन में रूसी तेल के कुछ खरीदार अपनी खरीदारी जारी रखे हुए हैं।

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