search
 Forgot password?
 Register now
search

चित्रकूट में अलौकिक दीवाली: मंदाकिनी तट पर दीपदान, पांच दिन तक दिखते हैं दिव्य नज़ारे

LHC0088 2025-10-28 19:16:42 views 1253
  



जागरण संवाददाता, चित्रकूट। धनतेरस से आरंभ हुए पांच दिवसीय दीपदान मेले का उल्लास चित्रकूट में चरम पर है। दीपावली की अमावस्या के एक दिन पूर्व छोटी दीपावली (नरक चतुर्दशी) पर मंदाकिनी नदी के तट और रामघाट दीपों की जगमग रोशनी से आलोकित हो उठे। गोधूलि बेला में देशभर से आए श्रद्धालुओं ने दीपदान कर सुख-समृद्धि की कामना की। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

रामघाट, मंदाकिनी तट और कामदगिरि परिक्रमा क्षेत्र श्रद्धालुओं से खचाखच भर गए। श्रद्धालुओं ने पहले मंदाकिनी में डुबकी लगाई और फिर घी और तेल के दीयों से दीपदान किया। दीपों की छटा से पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक आभा में नहा गया। श्री चित्रकूटधाम तीर्थ विकास परिषद द्वारा बीते तीन वर्षों से मेले की भव्यता में और इजाफा किया गया है।

इस बार चित्रकूटधाम कर्वी स्टेशन से लेकर रामघाट और कामदगिरि तक पूरे क्षेत्र को दिव्य स्वरूप में सजाया गया है। विशेष सजावट के साथ 13 एलईडी तोरण द्वार और प्रमुख चौराहों की भव्य सजावट ने रात्रिकाल में दिन जैसा दृश्य उपस्थित किया। डीएम शिवशरणप्पा जीएन और एसपी अरुण कुमार सिंह ने मेला क्षेत्र की कई बार निगरानी की। एडीएम, एसडीएम, एएसपी, सीओ समेत प्रशासनिक अधिकारी लगातार भ्रमण पर रहे। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एलआईयू की टीमें सादी वेशभूषा में तैनात थीं।

पूरे क्षेत्र में 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, वहीं ड्रोन से भी निगरानी की गई। जल पुलिस, सिविल पुलिस, यातायात पुलिस और मेटल डिटेक्टर से सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इस बार बेहतर ट्रैफिक प्लान तैयार किया गया। बसों, जीप, कार, ई-रिक्शा और बाइक के लिए अलग-अलग पार्किंग स्थल निर्धारित किए गए, वहीं पैदल श्रद्धालुओं के लिए वन-वे मार्ग बनाया गया। इस सुव्यवस्था के चलते श्रद्धालुओं को बिना किसी कठिनाई के दर्शन और दीपदान का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

महंत दिव्यजीवन दास के अनुसार, जब भगवान राम लंका विजय कर चित्रकूट आए थे तब अमावस्या की रात थी। माता सीता ने पूरे चित्रकूट को दीपमालिका से प्रकाशित किया था। तभी से दीपावली की परंपरा यहां विशेष रूप से मनाई जाती है। चित्रकूट की यह परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत है, जितनी त्रेतायुग में थी।
आज मुख्य स्नान और दीपदान, कल से गधा मेला

मुख्य स्नान और दीपदान आज सोमवार को होगा, हालांकि अमावस्या दो दिन की होने से मंगलवार को भी दीपदान की परंपरा निभाई जाएगी। इस बार दीपोत्सव में 40 लाख श्रद्धालुओं की भागीदारी की संभावना जताई गई है। मंगलवार से पारंपरिक गधा मेला भी शुरू होगा।
मौन व्रत व देवारी नृत्य

पांच दिवसीय दीपदान मेला में सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिलेंगे। बुंदेलखंड के प्रसिद्ध लोकनृत्य दिवारी की धूम रहेगी। दीपावली के दूसरे दिन परीवा को दिवारी नृत्य पूरा मेला क्षेत्र मयूरी नजर आएगा। मौनियों की टोली मोर पंख और लाठी के साथ नृत्य करती जगह-जगह देखी जाएंगी। दिवारी नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन भी होगा। यह बुंदेलखंड का सबसे प्राचीन लोकनृत्य है।
गधा मेला

दीपावली पर चित्रकूट में विशाल गधा मेला भी लगता है। मंदाकिनी तट में लगने वाले गधा मेला में यूपी, एमपी समेत विभिन्न प्रांत के व्यापारी गधों को बेंचने और खरीदने आते हैं। पांच दिन में यहां पर एक करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार गधों का होता है। जिसकी तैयारी भी सतना जिला की नगर पंचायत नयागांव ने शुरू कर दिया है। पिछली बार एक गधा 10 लाख में बिक्रा था।
like (0)
LHC0088Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
LHC0088

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1510K

Credits

Forum Veteran

Credits
156138

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com