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Gangotri Glacier: सिकुड़ रहा गंगोत्री ग्लेशियर, 60 साल में इतने किमी घट गया आकार

LHC0088 2025-12-18 00:08:00 views 1224
  

डीबीएस महाविद्यालय के भूगर्भ विज्ञान विभाग ने गंगोत्री ग्लेशियर पर किया अध्ययन. File Photo



राज्य ब्यूरो, देहरादून । दून के डीबीएस महाविद्यालय के भूगर्भ विज्ञान विभाग ने गंगोत्री ग्लेशियर के साल दर साल सिकुड़ने पर अध्ययन रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले 60 वर्ष में गंगोत्री ग्लेशियर 36 किलोमीटर तक सिकुड़ गया है। यानी इसका धनत्व 36 किमी कम हो गया है। ग्लेशियर के सिमटने के कारण वैश्विक तापमान वृद्धि (ग्लोबल वार्मिंग), अवैज्ञानिक निर्माण, नदी घाटियों में खनन, जंगलों की कटाई, बसावट वाले क्षेत्रों में लगातार विस्तार, ओजाेन प्रभाव के प्रमुख कारक को शामिल किया गया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

महाविद्यालय के भूगर्भ विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर दीपक भट्ट के अनुसार कि धराली आपदा का एक बड़ा कारण ग्लेशियर का सिकुड़ना और बर्फ विहीन चोटियों का कमजोर पड़ना भी रहा है। वर्ष 1960 तक गोमुख ग्लेशियर की अंतिम टेल (पूंछ) धराली तक फैली हुई थी, लेकिन वर्ष 2025 आते-आते ग्लेशियर लगभग 36 किमी पीछे खिसककर गोमुख क्षेत्र के आसपास सिमट गया है। यही नहीं, 13 से 14 हजार फीट ऊंचाई वाली चोटियों पर तापमान में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की जा रही है। इसमें धराली गांव के ठीक ऊपर स्थित हिमाच्छादित चोटी भी शामिल है, जो पिघलते हिमखंडों के खतरे को और बढ़ा रही है।

डीबीएस कालेज, देहरादून के भूगर्भ विज्ञान विभागाध्यक्ष डा. दीपक भट्ट ने वर्ष 1999 से वर्ष 2001 के बतौर शोधार्थी शिक्षक के रूप में तीन साल तक गोमुख ग्लेशियर पर शोध किया था। इस वर्ष धराली (उत्तरकाशी) आपदा के बाद वह गंगोत्री ग्लेशियर पर शोध को अपने विभाग के शोधार्थियों के साथ आगे बढ़ा रहे हैं और हर छह-छह महीने में एक अध्ययन रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।
राज्य के अन्य ग्लेशियर भी हो रहे प्रभावित

उत्तराखंड में गंगोत्री ग्लेशियर के अलावा पिंडारी, मिलम, खतलिंग, बागिनी, कफनी, सुंदरढूंगा, रालम और नामिक जैसे प्रमुख ग्लेशियरों पर भी ग्लोबल वार्मिंग से अछूते नहीं हैं। प्रो. दीपक भट्ट कहते हैं कि वैश्विक तापमान वृद्धि नदी घाटियों में खनन, जंगलों के साथ शहरीकरण से ग्लेशियर प्रभावित हैं।

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