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मुस्लिम देश में सबसे अमीर है ये हिंदू, 50 रुपये से खड़ा किया अरबों का साम्राज्य

Chikheang 2025-12-18 22:07:42 views 1122
  

ओमान के सबसे अमीर भारतीय कारोबारी पीएनसी मेनन। (फोटो- sobha.com)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के ओमान दौरे पर हैं। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान भारत और ओमान के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत होनी है।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ओमान दौरे के दौरान वहां के सबसे अमीर भारतीय कारोबारी पीएनसी मेनन एक बार फिर चर्चा में हैं। उनकी कहानी संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की ऐसी मिसाल है, जिसने उन्हें 50 रुपये से 23 हजार करोड़ रुपये के कारोबारी साम्राज्य तक पहुंचा दिया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
कौन हैं पीएनसी मेनन?

पीएनसी मेनन ओमान के सबसे अमीर शख्स माने जाते हैं। वह शोभा लिमिटेड के संस्थापक और प्रमुख हैं। उनका जन्म केरल के पालघाट जिले में हुआ था। उनका पूरा नाम पुथन नादुवक्कट चेंथमरक्ष मेनन है।
संकट और संघर्ष

मेनन की जिंदगी में पहला बड़ा संकट तब आया जब वह सिर्फ दस साल के थे। उनके पिता का असमय निधन हो गया। पिता किसान थे। इसके बाद परिवार पर आर्थिक परेशानियों का पहाड़ टूट पड़ा। मां अक्सर बीमार रहती थीं। दादा अनपढ़ थे और पढ़ाई बीच-बीच में रुकती रही।
कारोबार की शुरुआत

आर्थिक तंगी के कारण मेनन बीकॉम की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए। बिना डिग्री उन्होंने इंटीरियर डिजाइन और फर्नीचर का काम शुरू किया। 1970 के दशक में उन्होंने लकड़ी के फर्नीचर की एक छोटी सी कंपनी खड़ी की। यहीं से उनकी किस्मत ने करवट ली।
ओमान में बदली किस्मत

ओमान में मेनन ने 3.5 लाख रुपये का लोन लिया। इंटीरियर डेकोरेशन कंपनी शुरू की। शानदार काम के दम पर बड़े प्रोजेक्ट हासिल किए। उनका हुनर ओमान की प्रतिष्ठित इमारतों जैसे सुल्तान कबूस मस्जिद और अल बुस्तान पैलेस में देखने को मिला।
शोभा डेवलपर्स की स्थापना

साल 1995 में मेनन भारत लौटे और बेंगलुरु में शोभा डेवलपर्स की नींव रखी, जिसका नाम उन्होंने अपनी पत्नी सोभा के नाम पर रखा। आज कंपनी 12 राज्यों में काम करती है। बाजार पूंजीकरण करीब 14,789 करोड़ रुपये है और कुल कारोबारी साम्राज्य लगभग 23 हजार करोड़ रुपये है।
क्वालिटी से समझौता नहीं

मेनन क्वालिटी को लेकर सख्ती की मिसाल हैं। इंफोसिस के हैदराबाद कैंपस में निर्माण कार्य पूरा होने के बाद सभी ने उसे मंजूरी दे दी। लेकिन जब मेनन ने खुद निरीक्षण किया, तो उन्होंने 10,000 वर्ग फीट की टाइल्स उखाड़कर दोबारा लगाने का आदेश दे दिया।
समाज के लिए योगदान

खुद पढ़ाई पूरी न कर पाने वाले मेनन ने समाज के लिए बड़ा सपना देखा। गांव में अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्कूल बनवाया। सुपरस्पेशलिटी अस्पताल बनवाए और बुजुर्गों के लिए वृद्धाश्रम भी बनवाए। वह भी गरीबों के लिए पूरी तरह मुफ्त।
युवाओं के लिए प्रेरणा

पीएनसी मेनन का जीवन युवाओं को यह सिखाता है कि हालात कितने भी कठिन हों, हार मानना विकल्प नहीं है। मेहनत और अनुशासन से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। समय और गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं करना चाहिए।
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