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Budget 2026: 2014 से 2025 तक…मोदी सरकार के वो 14 बजट, जिन्होंने बदली भारतीय अर्थव्यवस्था की तस्वीर

deltin55 2026-2-2 14:20:59 views 42
                 

                          


            

            


              
            

                        
                        
                     







                        
                        

14 Budgets Of Modi Government: मोदी सरकार साल 2014 से अब तक कुल 14 बजट पेश कर चुकी है, जिनमें चुनावी वर्षों में पेश किए गए दो अंतरिम बजट भी शामिल हैं। पहले कार्यकाल के दौरान तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लगातार पांच बार बजट पेश किया। लोकसभा चुनाव के कारण फरवरी 2019 में अंतरिम बजट पेश किया गया, जिसके बाद जुलाई 2019 में पूर्ण बजट प्रस्तुत किया गया।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 जुलाई 2024 को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश किया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 13वां बजट था। वहीं 1 फरवरी 2025 को वित्त मंत्री ने 14वां बजट पेश किया था।

अब 1 फरवरी 2026 को निर्मला सीतारमण मोदी सरकार का 15वां बजट पेश करेंगी। यह पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री के रूप में उनका नौवां बजट होगा। मोदी सरकार के अब तक के बजटों में जहां ब्रिटिश कालीन परंपराओं को तोड़ा गया, वहीं कर व्यवस्था, कल्याण योजनाओं, निवेश, बुनियादी ढांचे और सामाजिक नीतियों से जुड़े कई बड़े फैसले लिए गए, जिनका असर आम नागरिक से लेकर उद्योग जगत तक पड़ा है। आइए नजर डालते हैं मोदी सरकार के कार्यकाल में पेश किए गए बजटों के प्रमुख बिंदुओं पर।

            

            
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब तक कुल 14 बजट पेश किए जा चुके हैं। इनमें पहले कार्यकाल के दौरान तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा प्रस्तुत किए गए पांच बजट शामिल हैं। लोकसभा चुनाव के कारण फरवरी 2019 में अंतरिम बजट पेश किया गया, जिसे अरुण जेटली के अस्वस्थ होने के कारण केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने प्रस्तुत किया। इसके बाद जुलाई 2019 में पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पूर्ण बजट पेश किया।

2014 के बाद से मोदी सरकार द्वारा पेश किए गए बजटों में करदाताओं को राहत देने वाले फैसलों के साथ-साथ रेल, एफडीआई, बुनियादी ढांचा, सामाजिक कल्याण और आर्थिक सुधारों से जुड़े कई बड़े एलान किए गए, जिनका असर देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता दोनों पर पड़ा।

साल 2014 में लोकसभा चुनाव के कारण फरवरी में अंतरिम बजट पेश किया गया था। चुनाव के बाद सत्ता में आई मोदी सरकार ने जुलाई 2014 में अपना पहला पूर्ण बजट प्रस्तुत किया, जिसे तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पेश किया। 2014 के बजट में मध्यम वर्ग को राहत देने पर विशेष जोर दिया गया। आयकर छूट सीमा को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये किया गया, जबकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दी गई।

इसके साथ ही सेक्शन 80C के तहत टैक्स डिडक्शन की सीमा को 1.1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये किया गया। यह बजट नई सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं और कर सुधारों की दिशा का संकेतक माना गया।

साल 2015 के बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कई अहम आर्थिक सुधारों की घोषणा की। सबसे बड़ा फैसला वेल्थ टैक्स को समाप्त करने का रहा। इसके साथ ही 1 करोड़ रुपये से अधिक की वार्षिक आय वाले व्यक्तियों पर सरचार्ज को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया। बजट में दीर्घकालिक बचत और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश पर मिलने वाले ब्याज को टैक्स फ्री किया गया।

एनपीएस (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली) में निवेश पर 50,000 रुपये की अतिरिक्त टैक्स छूट की घोषणा की गई। इसके अलावा बीमा क्षेत्र को राहत देते हुए व्यक्तिगत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स डिडक्शन की सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया।

मोदी सरकार के 2016 के बजट में करदाताओं को राहत देने पर जोर दिया गया। 5 लाख रुपये से कम आय वालों के लिए टैक्स रिबेट को 2,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये किया गया। किराए पर रहने वालों के लिए सेक्शन 80GG के तहत टैक्स छूट की सीमा 24,000 रुपये से बढ़ाकर 60,000 रुपये कर दी गई। वहीं, 1 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले व्यक्तियों पर सरचार्ज बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया।

साल 2017 का बजट कई ऐतिहासिक बदलावों के लिए जाना जाता है। पहली बार आम बजट और रेल बजट को एक साथ पेश किया गया। 2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक की आय पर इनकम टैक्स दर को 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया। करदाताओं को 12,500 रुपये तक का टैक्स रिबेट दिया गया। इसके अलावा राजनीतिक दलों के लिए नकद चंदे की सीमा 2,000 रुपये तय की गई।

2018 के बजट में वेतनभोगी वर्ग और छोटे उद्योगों पर फोकस किया गया। सैलरी क्लास के लिए 40,000 रुपये की मानक कटौती का प्रावधान किया गया। हेल्थ और एजुकेशन सेस को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत कर दिया गया। वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज आय पर टैक्स छूट की सीमा 10,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये की गई। 1 लाख रुपये से अधिक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 10 प्रतिशत टैक्स लगाया गया। वहीं, 250 करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाले MSME पर टैक्स दर 25 प्रतिशत तय की गई।

लोकसभा चुनाव के कारण 2019 में अंतरिम बजट पेश किया गया, जिसे अरुण जेटली के अस्वस्थ होने के कारण पीयूष गोयल ने प्रस्तुत किया। इस बजट में मध्यम वर्ग, किसानों और श्रमिकों पर विशेष ध्यान दिया गया। 5 लाख रुपये तक की आय को टैक्स फ्री किया गया। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए 3,000 रुपये मासिक पेंशन योजना की घोषणा की गई। एचआरए की सीमा बढ़ाकर 2.40 लाख रुपये कर दी गई।



पूर्ण बजट में टैक्स रिबेट की सीमा 2,500 रुपये से बढ़ाकर 12,500 रुपये की गई और स्टैंडर्ड डिडक्शन को 50,000 रुपये किया गया। किराए पर टीडीएस की सीमा 1.80 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.40 लाख रुपये की गई। उच्च आय वर्ग पर सरचार्ज बढ़ाया गया। होम लोन पर अतिरिक्त टैक्स छूट दी गई। हाई-वैल्यू लेनदेन करने वालों के लिए आईटीआर दाखिल करना अनिवार्य किया गया।

2020 के बजट में नई वैकल्पिक टैक्स व्यवस्था लागू की गई, जिससे करदाताओं को पुरानी और नई टैक्स प्रणाली में से चुनने का विकल्प मिला। डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (DDT) को समाप्त किया गया। वरिष्ठ नागरिकों को ITR दाखिल करने से राहत दी गई। सस्ते मकानों पर टैक्स छूट की अवधि बढ़ाई गई।

2021 के बजट में निवेश और निजीकरण पर जोर दिया गया। स्टार्टअप टैक्स छूट की अवधि बढ़ाई गई। ग्रामीण बुनियादी ढांचे के लिए 40,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया। बीपीसीएल, एयर इंडिया समेत कई सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश की घोषणा की गई। इंश्योरेंस सेक्टर में एफडीआई की सीमा 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत कर दी गई।

2022 के बजट में विकास और रोजगार पर फोकस किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 80 लाख घर बनाने का लक्ष्य रखा गया। युवाओं के लिए 60 लाख नौकरियों का लक्ष्य घोषित किया गया।

2023 के बजट में नई टैक्स प्रणाली के तहत 7 लाख रुपये तक की आय को टैक्स फ्री किया गया, जो पहले 5 लाख रुपये थी। सरकार ने बजट की 7 प्राथमिकताएं तय कीं, जिनमें समावेशी विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश, हरित ऊर्जा और युवा शक्ति शामिल थीं।

2024 के अंतरिम बजट में भारत की GDP वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया। पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 11.11 लाख करोड़ रुपये किया गया। राजकोषीय घाटा GDP का 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान रखा गया। युवाओं के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का फंड और राज्यों के लिए 50 वर्षीय ब्याज मुक्त ऋण योजना जारी रखने की घोषणा की गई।

23 जुलाई 2024 को पेश किए गए बजट में एंजल टैक्स समाप्त करने और नई टैक्स प्रणाली में बदलाव की घोषणा की गई। पहली बार नौकरी करने वालों के लिए सरकारी वेतन सहायता योजना लाई गई। EPFO से जुड़े कर्मचारियों को DBT के जरिए एक महीने का वेतन (अधिकतम 15,000 रुपये) तीन किस्तों में देने का प्रावधान किया गया। सरकार के अनुसार इससे लगभग 2.10 करोड़ युवाओं को लाभ मिलने का अनुमान है।

यह भी पढ़ें: Budget 2026: 8वें वेतन आयोग को लेकर अटकलें तेज, केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों की बढ़ी उम्मीदें
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