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साहित्यकार समाज के लिए जिम्मेदार; पटना यूनिवर्सिटी में प्रो. विकास शर्मा ने न्याय और शिक्षा पर दिए महत्वपूर्ण विचार

cy520520 2026-1-24 21:27:12 views 1255
  

पटना‍ विश्‍वव‍िद्यालय में प्रो. विकास शर्मा का व्‍याख्‍यान।  



जागरण संवाददाता, पटना। साहित्यकार या लेखक किसी जाति, धर्म, क्षेत्र, देश व समय का नहीं, बल्कि वह युग निर्माता होता है।

रचनाकार का प्रथम कर्तव्य है, अधिनायकवादियों तथा सत्ता व अधिकार का दुरुपयोग करने वालों को लेखनी के माध्यम से रास्ता दिखाना।

व्यवस्था से बड़ा व्यक्ति नहीं होता है और व्यक्ति के लिए व्यवस्था में परिवर्तन किसी के हित में नहीं होता है तो यह शिक्षा और साहित्य के लिए श्रेयस्कर कैसे होगा।

उक्त बातें पटना विश्वविद्यालय में पहुंचे अंग्रेजी उपन्यासकार व अखिल भारतीय अंगेजी प्राध्यापक संघ के राष्ट्रीय महामंत्री प्रो. विकास शर्मा ने कही।

उन्होंने कहा कि साहित्य तभी दीर्घायु और समाज के हितकर में होगा, जब निष्पक्ष लिखा जाएगा। कवि व प्रखर वक्ता डॉ. कुमार विश्वास के बड़े भाई डाॅ. विकास शर्मा सीसीएस यूनिवर्सिटी, मेरठ में अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष हैं। यह 15 से अधिक उपन्यास लिख चुके हैं। इनके उपन्यासों पर शोध पत्र भी प्रकशित किए गए हैं।
न्याय के लिए किसी पर अन्याय नहीं हो

उन्होंने कहा कि जातिगत गणना समाज को बांट देगी। दबे-कुचले को न्याय मिलना चाहिए, लेकिन अन्य जातियों के साथ अन्याय के आधार पर नहीं हो।

उन्होंने अपने नए उपन्यास आल हर फायर्स पर चर्चा की। कहा, इसमें विश्वविद्यालयों में नियुक्ति में भ्रष्टाचार को दर्शाया गया है।

विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षकों को उनके कार्य के विपरित सेवा ली जा रही है। नीति बनाने में संबंधितों से विमर्श नहीं होने पर दुर्घटना की संभावना बनी रहती है।

शिक्षकों को शोध और कक्षा से जितना करीब रखा जाएगा, उतना ही विद्यार्थियों का भला होगा। कैंपस में बाहरी लोगों को दखल बढ़ता जा रहा है। जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव गुणवत्ता और माहौल पर देखा जा सकता है।
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