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हर साल 2 लाख से अधिक भारतीय छोड़ रहे हैं नागरिकता, ये हैं पलायन के पीछे के मुख्य कारण

LHC0088 2025-12-19 05:06:22 views 985
  

हर साल 2 लाख से अधिक भारतीय छोड़ रहे हैं नागरिकता (सांकेतिक तस्वीर)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत से नागरिकता त्यागने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। संसद में विदेश मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों (2020-2024) में लगभग 9 लाख भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ी, जिसमें से 2022 से हर साल 2 लाख से अधिक मामले दर्ज हुए। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

2011 से 2024 तक कुल 20.6 लाख से ज्यादा भारतीयों ने विदेशी नागरिकता अपनाई। यह ट्रेंड मुख्य रूप से उच्च कुशल पेशेवरों, धनी व्यक्तियों और छात्रों में देखा जा रहा है, जो बेहतर अवसरों की तलाश में देश छोड़ रहे हैं। सरकार इसे “व्यक्तिगत कारण“ बताती है, जबकि विपक्ष इसे जीवन की गुणवत्ता, शिक्षा और शासन से जुड़ी चिंताओं से जोड़ता है।

2024 में 2.06 लाख भारतीयों ने नागरिकता त्यागी, जो कोविड के बाद का नया सामान्य स्तर दर्शाता है। मुख्य कारण भारत में ड्यूल सिटीजनशिप न होना है—विदेश में स्थायी बसावट या नागरिकता लेने पर भारतीय पासपोर्ट छोड़ना जरूरी हो जाता है। प्रवासी बेहतर वेतन, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ वातावरण और ग्लोबल मोबिलिटी का हवाला देते हैं।

अमीर भारतीयों (मिलियनेयर्स) का पलायन भी जारी है, हालांकि 2024 में यह संख्या घटकर 4,300 रहने का अनुमान है। सरकार डायस्पोरा को संपत्ति मानती है, लेकिन विपक्ष इसे ब्रेन ड्रेन और सुधारों की कमी का संकेत बताता है।
पलायन के प्रमुख 5 कारण

  • ड्यूल सिटीजनशिप न होना: भारत विदेशी नागरिकता लेने पर स्वतः भारतीय नागरिकता समाप्त कर देता है। लंबे समय abroad रहने वाले, खासकर परिवार वाले, पूर्ण अधिकारों (वोटिंग, संपत्ति) के लिए विदेशी नागरिकता चुनते हैं। OCI कार्ड सीमित सुविधाएं देता है।
  • बेहतर आर्थिक और करियर अवसर: उच्च वेतन, ग्लोबल जॉब्स और कर अनुकूल देश (जैसे UAE—no income tax) आकर्षित करते हैं। कुशल भारतीय अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया में उच्च शिक्षा/रोजगार के बाद बस जाते हैं।
  • जीवन की बेहतर गुणवत्ता: स्वच्छ हवा-पानी, विश्वसनीय इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा प्रणाली मुख्य कारण। सर्वे में कई भारतीय प्रदूषण, ट्रैफिक और सार्वजनिक सेवाओं की कमी का जिक्र करते हैं।
  • बेहतर ग्लोबल मोबिलिटी और सुरक्षा: विदेशी पासपोर्ट (जैसे अमेरिकी/कनाडाई) से 180+ देशों में वीजा-फ्री यात्रा मिलती है, जबकि भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग कम है। परिवार की सुरक्षा और बच्चों की भविष्य भी बड़ा फैक्टर।
  • धनी वर्ग का पलायन: Henley रिपोर्ट के अनुसार, अमीर भारतीय UAE, सिंगापुर जैसे देशों में निवेश माइग्रेशन प्रोग्राम्स से आकर्षित होते हैं। कराधान, संपत्ति सुरक्षा और लग्जरी लाइफस्टाइल कारण हैं।
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