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छह साल में पांच हत्याएं, 2019 में ऐसे शुरू हुई हिमांशु भाऊ-सन्नी रिटौली गैंगवार, यहां देखें आपराधिक रिकॉर्ड

deltin33 2025-12-20 15:06:36 views 660
  
2019 में ऐसे शुरू हुई हिमांशु भाऊ-सन्नी रिटौली गैंगवार (File Photo)



मनोज खर्ब, रोहतक। रोहतक जिले के रिटौली गांव से शुरू हुई हिमांशु भाऊ और सन्नी रिटौली (अंकित बाबा) गैंग की रंजिश पिछले छह वर्षों में पांच हत्याओं में बदल चुकी है।

यह गैंगवार वर्ष 2019 में एक प्राइवेट बस की सुरक्षा को लेकर शुरू हुए विवाद से शुरू हुई, जो बाद में रंगदारी, लूट, अवैध शराब और सुपारी किलिंग तक पहुंच गई। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2019 में रिटौली निवासी हंसराज उर्फ हंसे, जो अंकित गैंग का सदस्य था, ने एक प्राइवेट बस खरीदी थी। बस को रूट पर चलाने को लेकर आए दिन झगड़े होते थे। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इसी कारण हंसे ने हिमांशु भाऊ से बस की सुरक्षा मांगी। इसके बाद हिमांशु के साथी बस के साथ जाने लगे। कुछ समय बाद हिमांशु ने यह कहकर कार की मांग की कि बाइक से सुरक्षा संभव नहीं है। हंसे ने कार खरीदी, लेकिन कार खरीदने के लिए लिए गए लोन में गांव के ही अंकित उर्फ बाबा के परिवार के दस्तावेज लगवाए गए।

कार हालांकि हिमांशु के साथियों के पास रही। कुछ समय बाद हंसे ने कार की किश्तें भरनी बंद कर दीं। जब बैंक कर्मचारी कर्ज वसूली के लिए अंकित के घर पहुंचे तो विवाद गहराया। अंकित के परिजनों ने हिमांशु पक्ष से कार वापस मांगी, लेकिन कार नहीं लौटाई गई। इसी बात से दोनों पक्षों के बीच रंजिश की नींव पड़ी।
स्टेडियम में चली पहली गोली

ग्रामीण बताते हैं कि 2019 में ही हिमांशु भाऊ और अंकित के भाई सन्नी रिटौली के बीच कहासुनी हुई, जो इतनी बढ़ी कि दोनों ने गांव के स्टेडियम में आमने-सामने आने की चुनौती दे दी।

तय समय पर हिमांशु पिस्तौल लेकर पहुंचा और सन्नी पर गोली चला दी। इस मामले में हिमांशु को गिरफ्तार किया गया। उसने जिस पिस्तौल से फायरिंग की थी, वह उसके चाचा अशोक उर्फ शोकी की थी, जिसके खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज थे।
पहली हत्या: रोहित उर्फ बजरंग

दोनों गैंग एक ही गांव और जिले में सक्रिय थे, जिससे टकराव बढ़ता गया। इसका नतीजा 2 मार्च 2022 को सामने आया, जब अंकित गैंग ने हिमांशु के चाचा अशोक उर्फ शौकी के बेटे रोहित उर्फ बजरंग की गोली मारकर हत्या कर दी। वारदात के बाद भाग रहे आरोपितों को पकड़ने की कोशिश में राजेंद्र उर्फ माडू की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस दोहरे हत्याकांड में अंकित उर्फ बाबा के चाचा अनिल की रेकी में भूमिका सामने आई।
बदले में बस में घुसकर हत्या

दोहरे हत्याकांड के ठीक पांच दिन बाद 7 मार्च 2022 को हिमांशु भाऊ गैंग ने बदला लेते हुए सन्नी गैंग के सदस्य हंसे की गांव के बस अड्डे पर बस में घुसकर हत्या कर दी।
चौथी हत्या: अंकित के चाचा अनिल

चौथी हत्या 1 जून 2025 को हुई, जब अंकित के चाचा अनिल, जो जमानत पर बाहर आया था, की गोली मारकर हत्या की गई। यह हत्या भी हिमांशु भाऊ के इशारे पर कराई गई।
यह है आपराधिक रिकॉर्ड

पुलिस के अनुसार अंकित उर्फ बाबा पर 2016 में पहला केस दर्ज हुआ था। 2018 में दोबारा मारपीट व धमकी, 2022 में हत्या व 2023 में गिरफ्तारी के बाद वह जेल में बंद है। उसके भाई सन्नी पर 2021 से 2022 के बीच मारपीट, जानलेवा हमला और हत्या के केस दर्ज हुए। वहीं हिमांशु भाऊ मूल रूप से रिटौली का रहने वाला है। 2019 तक छात्र रहा हिमांशु ने 17 वर्ष की उम्र में फायरिंग की। नाबालिग होने पर उसे हिसार सुधार गृह भेजा गया, वहां फरार हो गया। आज हिमांशु भाऊ पर हत्या, लूट, फिरौती और धोखाधड़ी के 18 से अधिक केस दर्ज हैं।
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