अस्पतालों में अटेंडेंट को भी मिलेगी रहने की सुविधा (फाइल फोटो)
सुधीर तंवर, पंचकूला। सर्वे संतु निरामया...यानी कि ऐसा समाज जहां सभी सुखी हों, रोग-मुक्त रहें, सभी का कल्याण हो और कोई भी दुख का भागी न बने। स्वस्थ समाज होगा तो स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण होगा। इस कड़ी में नया साल स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
नूतन वर्ष में कई बड़े प्रोजेक्ट सिरे चढ़ने वाले हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में काफी सुधार होगा। इसके लिए आगामी बजट में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 12 हजार करोड़ रुपये का प्रविधान किए जाने की उम्मीद है।
सहयोगियों को मिलेंगे आश्रय गृह
सभी जिला अस्पतालों में मरीजों के लिए निजी कमरों तथा उनके सहयोगियों (तीमारदारों) को आश्रय गृह की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए काम शुरू हो चुका है। हर जिला अस्पताल व हर सरकारी मेडिकल कालेज में 50 बेड का क्रिटिकल केयर ब्लाक बनाए जाने हैं। 14 जिलों गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, मेवात, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, जींद, भिवानी, रोहतक,
करनाल, पानीपत, सोनीपत, झज्जर व चरखी दादरी के जिला अस्पतालों में 70 एडवांस लाइफ स्पोर्ट एंबुलेंस भेजी जा रही हैं ताकि मरीजों को आपात स्थिति में तुरंत उपचार उपलब्ध कराया जा सके। अंबाला, पंचकूला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर और फरीदाबाद की तर्ज पर कैंसर मरीजों के लिए सभी जिलों में डे केयर सेंटर बनाए जाएंगे।
21 हजार पद स्वीकृत
स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट तथा पैरामेडिकल स्टाफ के कुल 21 हजार 296 स्वीकृत पद हैं। इनमें से 15 हजार 912 पद भरे हुए हैं जबकि 5384 पद रिक्त हैं। सिविल सर्जनों के 16, एसएमओ के 219,
मेडिकल आफिसर के 777, सीनियर डेंटल सर्जन के 20, डेंटल सर्जन के 58, डेंटल असिस्टेंट के 194 और एमपीएचडब्ल्यू के 597 पद रिक्त हैं। विभिन्न पदों को भरने के लिए हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग, हरियाणा लोक सेवा आयोग तथा विभागीय चयन समिति को प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। इन पदों को भरे जाने से मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध हो सकेगा।
हरियाणा मेडिकल काउंसिल के अनुसार प्रदेश में 1225 लोगों की आबादी पर एक एलोपैथी डॉक्टर है। अगर रजिस्टर्ड आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी डाक्टरों को जोड़ लिया जाए तो 819 आबादी पर एक डॉक्टर है।
नेशनल हेल्थ पालिसी और इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड्स के अनुसार हेल्थ और मेडिकल एजुकेशन मिलाकर हर 1000 आबादी पर एक हास्पिटल बेड होना चाहिए। ईएसआइसी और प्राइवेट हास्पिटल समेत सरकारी हेल्थ सुविधाओं में हर 1000 आबादी पर दो बेड होने चाहिए। इस लक्ष्यपूर्ति के लिए व्यापक कार्य याेजना बनाई गई है।
स्वास्थ्य सेवाएं सुविधा नहीं, लोगों का अधिकार: नायब
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी कहते हैं कि स्वास्थ्य सेवाएं सुविधा नहीं है, बल्कि लोगों का अधिकार है। इसी के मद्देनजर लोगों को उनके आसपास सस्ती एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं देने पर काम किया जा रहा है। डॉक्टर और आबादी का अनुपात बढ़ाने के लिए निरंतर नए मेडिकल कालेज बनाए जा रहे हैं ताकि एमबीबीएस सीटें बढ़ाई जा सकें।
वर्ष 2014 में एमबीबीएस की 700 सीटें थीं, जो अब बढ़कर 2710 हो गई हैं। इस दौरान जिला अस्पताल तथा उपमंडल अस्पताल 56 से बढ़कर 74 और सीएचसी 109 से बढ़ कर 122 हो चुकी हैं। आज पूरे प्रदेश में 15 मेडिकल कालेज, 10 दंत चिकित्सा कालेज, 19 फिजियोथैरेपी कालेज, 111 नर्सिंग कालेज तथा 182 नर्सिंग स्कूल हैं। सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस की मुफ्त सुविधा के अलावा गरीब परिवार आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज करा सकते हैं।
मिलेंगे यह नए प्रोजेक्ट
- पंचकूला, पानीपत, फरीदाबाद, सोनीपत, पलवल, सिरसा, कैथल, महेंद्रगढ़ के जिला अस्पतालों व मेडिकल कालेज नूंह में अति आधुनिक मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र शुरू होंगे
- झज्जर, पलवल, रोहतक और चरखी दादरी के जिला अस्पताल तथा अल आफिया जिला अस्पताल मांडी खेड़ा को 100 बेड से 200 बेड में अपग्रेड किया जाएगा। हिसार और पानीपत के जिला अस्पतालों में बेड 200 से बढ़ाकर 300 किए जाएंगे
- करनाल के जिला अस्पताल को सेक्टर-32 ए में शिफ्ट कर 200 बेड का नया अस्पताल बनाया जाएगा
- सभी जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन, एमआरआइ, अल्ट्रासाउंड, ब्लड एनालाइजर और डिजीटल एक्सरे की सुविधा मिलेगी
- रेवाड़ी व जींद में आयुष हर्बल पार्क बनाए जाएंगे
- हिसार में टीबी अस्पताल का नया भवन बनाया जाएगा
- नूंह के मांडीखेड़ा स्थित नागरिक अस्पताल में सिटी-स्कैन और एमआरआइ मशीन स्थापित की जाएंगी
- जींद के सफीदों में सरकारी नर्सिंग कालेज का निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा
डॉक्टरों को देना होगा अनुकूल माहौल
- काम के अत्यधिक बोझ, नाममात्र सुविधाओं और अनदेखी से दुखी डॉक्टर सरकारी सेवा से मुंह मोड़ रहे हैं। चिकित्सकों को अनुकूल माहौल उपलब्ध कराना होगा।
- विशेषज्ञ डाक्टरों को स्पेशल इंक्रीमेंट मिलनी चाहिए।
- दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड की तर्ज पर एसीपी (एश्योर्ड करियर प्रमोशन) का लाभ चार, नौ, 13 और 20 साल पर दिया जाना चाहिए।
- सेवारत डाक्टरों के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन में कोटा निर्धारित कर सातवें वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर किया जाना चाहिए
- विशेष काडर के तहत भर्तियां की जानी चाहिए ताकि डाक्टरों को सरकारी नौकरियों के लिए लुभाया जा सके।
स्वास्थ्य सेवाओं पर ऐसे बढ़ रहा खर्च
- वर्ष - बजट में आवंटित राशि (करोड़ रुपये)
- 2025-26 -10159. 54
- 2024-25 -9579.16
- 2023-24 -7,731.88
- 2022-23 -7,126.22
- 2021-22 -6,178.02
- 2020-21 -5,567.75
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