search

साल के आखिरी सप्ताह ने फिर दिए जमुई को जख्म, 2011 में लाल आतंक का तांडव; 2025 में पटरियों की चीत्कार

Chikheang Half hour(s) ago views 161
  

जमुई ट्रेन हादसे के बाद पटरियों को किया जा रहा दुरुस्त। (जागरण)



संदीप कुमार सिंह, सिमुलतला(जमुई)। क्या इसे महज संयोग कहें या वक्त का कोई क्रूर मजाक? दिसंबर की सर्द रातें और साल का आखिरी सप्ताह सिमुलतला के नसीब में जैसे अग्निपरीक्षा लेकर आता है।

कैलेंडर के पन्ने जब 2011 से 2025 तक पलटे तो तारीखें वही थीं, दर्द वही था, बस जख्म का स्वरूप बदल गया। 14 साल के लंबे फासले ने साबित कर दिया कि दिसंबर का अंत सिमुलतला के लिए अक्सर भारी गुजरता है। फर्क सिर्फ इतना है कि 2011 में इंसानियत का खून बहा था और 2025 में लोहे की पटरियों ने दम तोड़ा। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
2011 : जब बारूद के धुएं में घुट गया था उम्मीदों का दम

इतिहास के पन्नों पर जमी धूल हटाएं तो रूह कांप जाती है। वह 30 दिसंबर 2011 की काली रात थी। पूरा देश नए साल के जश्न की तैयारियों में मशगूल था, लेकिन सिमुलतला के पीपराडीह (कनौदी) में मौत का नंगा नाच चल रहा था। लाल आतंक, यानी माओवादियों ने ऐसा तांडव मचाया कि सात हंसते-खेलते परिवारों की खुशियां मातम में बदल गईं।

तीन लोगों की हत्या और चार का अपहरण कर बाद में उन्हें मौत के घाट उतार देने की घटना ने सिमुलतला की फिजा में ऐसा खौफ घोला था, जिसकी सिहरन आज भी महसूस की जा सकती है। उस वक्त न पटरियां रुकी थीं, न ट्रेनें, लेकिन जिंदगी थम गई थी।
2025 : जब 75 घंटे तक खामोश रही लाइफलाइन

वक्त का पहिया घूमा। 14 साल बीते और फिर वही मनहूस दिसंबर लौट आया। 27 दिसंबर 2025, शनिवार की रात। इस बार खतरा बारूद से नहीं, बल्कि तकनीकी विफलता से आया।

सिमुलतला स्टेशन के समीप मालगाड़ी बेपटरी हुई तो लगा जैसे इस क्षेत्र की धड़कन रुक गई हो। लोहे के परखच्चे उड़े, ओएचई तार टूटकर गिरे और हावड़ा-नई दिल्ली मेन लाइन पर सन्नाटा पसर गया। गनीमत रही कि इस बार किसी मां की गोद नहीं सूनी हुई, लेकिन 75 घंटों तक रेलवे की नाकेबंदी ने हजारों यात्रियों और स्थानीय लोगों की सांसें अटका दीं।
दर्द का वह साझा कैनवास

  • 2011 का जख्म : सात अनमोल जिंदगियां खोईं, पूरा इलाका दहशत में जीया
  • 2025 का जख्म : 75 घंटे का चक्का जाम, रेलवे को करोड़ों का नुकसान और अनिश्चितता का माहौल

सिमुलतला, जो न कभी रुका है, न कभी झुका है

सिमुलतला की मिट्टी की तासीर ही कुछ ऐसी है कि यह गिरता है, चोट खाता है, मगर फिर दोगुनी ताकत से खड़ा हो जाता है। 2011 में जब खून बहा तो सिमुलतला के लोगों ने अपने आंसुओं को पोंछकर दहशत को हराया था और अब 2025 में जब पटरियां टूटीं तो युद्धस्तर पर काम कर रहे रेलवे कर्मचारियों और स्थानीय सहयोग ने 75 घंटे की खामोशी को चीर दिया।

बुधवार की सुबह जैसे ही बाघ और मौर्या एक्सप्रेस ने अपनी सीटी बजाई, वह महज एक ट्रेन की आवाज नहीं थी, वह सिमुलतला की जीत का शंखनाद था। वह सीटी बता रही थी कि चाहे लाल आतंक का खौफ हो या लोहे की पटरियों का विध्वंस, सिमुलतला रुकना नहीं जानता।
2026 : नई उम्मीद, नई उड़ान

साल के आखिरी सप्ताह ने हमें जख्म जरूर दिए हैं, लेकिन हमारा हौसला नहीं तोड़ पाया। यह क्षेत्र अब अपने अतीत के मातम को पीछे छोड़, भविष्य की नई इबारत लिखने को तैयार है। पटरियों पर लौटी यह रफ्तार संदेश है कि आने वाला साल 2026 सिमुलतला के लिए अमन, शांति और विकास की नई पराकाष्ठा लेकर आएगा।

सिमुलतला गवाह है, वक्त कठिन हो सकता है पर यहां के लोगों का जज्बा उससे कहीं ज्यादा मजबूत है। हम टूटे नहीं हैं, हम और निखर कर दौड़ने को तैयार हैं।
like (0)
ChikheangForum Veteran

Post a reply

loginto write comments
Chikheang

He hasn't introduced himself yet.

410K

Threads

0

Posts

1410K

Credits

Forum Veteran

Credits
145537

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com