करोड़पति होने के बावजूद नहीं भर रहे प्रॉपर्टी टैक्स। निगम को करनी पड़ रही सख्ती।
टैक्स जमा करने के लिए तीन दिन का समय, नहीं तो प्रापर्टी बेच वसूली होगी
-कार्रवाई विशेष रूप से बड़े शोरूम, फैक्ट्रियों और कंपनियों पर केंद्रित होगी
-करीब 7100 ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपने प्रापर्टी टैक्स का भुगतान नहीं किया
जागरण संवाददाता, मोहाली। मोहाली नगर निगम ने प्राॅपर्टी टैक्स न भरने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। निगम ने टैक्स डिफाॅल्टरों को तीन दिन का समय दिया है। निगम अधिकारियों के अनुसार निर्धारित समय पर टैक्स जमा न करने वालों की प्राॅपर्टी अटैच कर दी जाएगी। यह कार्रवाई विशेष रूप से बड़े शोरूम, फैक्ट्रियों और कंपनियों पर केंद्रित होगी। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
नगर निगम ने ऐसे सभी डिफाॅल्टरों को नोटिस जारी कर दिए हैं। निगम का कहना है कि टैक्स वसूली को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नगर निगम से मिली जानकारी के मुताबिक, करीब 7100 ऐसे लोग हैं जिन्होंने अभी तक अपने प्राॅपर्टी टैक्स का भुगतान नहीं किया है।
कई बार इन लोगों को नोटिस भेजे गए। लेकिन 10-11 साल से भुगतान नहीं कर रहे हैं। इन लोगों ने टैक्स जमा नहीं किया तो बिना किसी और सूचना के उनकी संपत्ति सील कर दी जाएगी। सील होने के बाद अंदर रखे सामान, माल या स्टॉक के नुकसान की जिम्मेदारी मालिक की खुद की होगी। इसके बाद नगर निगम बकाया टैक्स वसूलने के लिए संपत्ति या सामान की नीलामी भी कर सकता है।
20 प्रतिशत जुर्माना और ब्याज भी देना होगा
टैक्स की रकम पर 20 प्रतिशत तक जुर्माने के साथ और 1 अप्रैल 2014 से अब तक का 18 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। यह कार्रवाई मोहाली के अलग-अलग सेक्टरों और फेज में मौजूद कई बड़ी औद्योगिक और कामर्शियल यूनिट पर लागू होगी। टैक्स नगर निगम कार्यालय, सेक्टर-68 में या एम-सेवा ऐप के जरिए आनलाइन भी जमा किया जा सकता है।
करोड़पति हैं डिफाॅल्टरों की सूची में
डिफाॅल्टरों में आम लोग ही नहीं बल्कि इंडस्ट्रियल यूनिट के मालिक भी हैं, जो कि हर बार टैक्स चुकाने से बचते हैं। डिफाॅल्टरों में इंडस्ट्रियल यूनिट के करीब 300 मालिक, कामर्शियल के 800 और छह गांवों के करीब 6,000 लोग हैं। इसमें गांव सोहाना और कुंभड़ा के लोगों को साल 2017 से टैक्स चुकाना है, जबकि मदनपुर और शाहीमाजरा गांव के लोगों को 2013 से टैक्स भरना है। अधिकारियों ने बताया कि इस बार अच्छी बात यह है कि सरकारी संस्थान समय से टैक्स भर रहे हैं। पहले कई विभाग डिफाॅल्टर होते थे। |