जागरण संवाददाता, लखनऊ। साइबर जालसाजों ने वित्त विभाग से सेवानिवृत्त 73 वर्षीय अधिकारी अमरजीत सिंह मनी लांड्रिंग के मामले में परिवार समेत जेल भेजने के नाम पर फंसाया। फिर 24 दिन तक(एक से 24 दिसंबर) डिजिटल अरेस्ट कर 90 लाख रुपये उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और झारखंड समेत अन्य राज्यों के खातों में ट्रांसफर करवा लिए। पिता को पेरशान देख बेटे को शक हुआ तो पूछा। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
दबाव बनाने पर जानकारी दी,जिसके बाद साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। इंस्पेक्टर साइबर क्राइम थाना बृजेश कुमार यादव के मुताबिक मामले 15 लाख रुपये जालसाजों के खातें में फ्रीज कराया गया है।
कानपुर रोड स्थित एलडीए कालोनी सेक्टर जी में अमरजीत सिंह परिवार के साथ रहते हैं। उनका बेटा अमरप्रीत सिंह बेंगलुरू में नौकरी करता है। एक दिंसबर को अमरजीत सिंह के पास वीडियो जालसाजों ने वीडियो काल किया। जालसाज ने बताया कि वह मुंबई साइबर क्राइम सेल का अफसर गिरीश कुमार बोल रहा है।
खुद को गिरीश बताने वाले जालसाज ने अमरजीत सिंह पर मनी लांड्रिंग केस में संलिप्तता बताई। कहा कि आपके खिलाफ मुंबई साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज है। गिरफ्तारी का वारंट जारी है। बैंक खातों में मनी लांड्रिंग के रुपयों के लेन-देन का हवाला दिया। अमरजीत के विरोध पर उन्हें और पूरे परिवार को जेल भेजने की धमकी दी। वाट्सएप पर कोर्ट का वारंट भेजा।
वारंट देखकर अमरजीत सिंह डर गए। यह देख जालसाज ने उन्हें और डराया। इसके बाद अमरजीत से उनके बैंक खातों और अन्य आर्थिक स्रोतों की जानकारी ली। जालसाज ने अमरजीत को अपनी गिरफ्तर लिए जाने का दावा किया। कहा कि हमारी टीम जो कहे वह करते जाइए।
नहीं तो पूरे परिवार को जेल भेज दूंगा। आपके रुपयों की जांच की जा जाएगी। एक करोड़ रुपये आपको हमारे खाते में ट्रांसफर करने होंगे। जांच पूरी होने के बाद यह रुपये आपको वापस कर दिए जाएंगे। इसके बाद पिता ने जालसाजों के द्वारा बताए गए बैंक खातों में करीब 90 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
बेटे से भी छिपाया, दबाव बनाने पर दी जानकारी: इंस्पेक्टर के मुताबिक अमरजीत सिंह ने अपने किसी परिवारीजन को डिजिटल अरेस्ट की जानकारी नहीं दी। 25 दिसंबर को अमरजीत सिंह छत पर खड़े होकर किसी से फोन पर बात कर रहे थे। वह बहुत घबराए हुए थे। बेटे अमरप्रीत ने देखा तो उसे शक हुआ। उसने पूछताछ की तो अमरजीत सिंह टाल मटोल करने लगे। इसके बाद 25 दिसंबर की शाम अमरजीत सिंह, पिता और परिवार के साथ एक रिश्तेदार के घर से कार्यक्रम से लौट रहे थे। पिता उस समय भी घबराए हुए थे। पूछने पर कोई जानकारी नहीं दी। घर लौटने पर काफी दबाव बनाया तब उन्होंने सारी बात बताई।
आनलाइन किया ट्रांसफर, दबाव में एफडी भी तोड़ी
अमरजीत सिंह ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने जालसाजों के बताए गए बैंक खाते में आनलाइन रकम ट्रांसफर कर दी। इसके बाद बैंक जाकर म्यूचुअल फंड तुड़वा दिए। इसके अलावा पंजाब नेशनल और अन्य बैंकों के खाते में पड़े रुपये निकालकर जालसाजों के खाते में ट्रांसफर किए थे। इंस्पेक्टर साइबर क्राइम बृजेश यादव के मुताबिक जालसाजों ने उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और झारखंड व कुछ अन्य राज्यों के बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराये हैं। जालसाजों के बैंक खाते में 15 लाख रुपये पीड़ित के फ्रीज करा दिए गए हैं।
यह करें, नहीं तो हो जाएंगे शिकार:
-अनजान नंबर से आने वाले फोन या मैसेज का जवाब देने से पहले सोचें।-किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बात करने से पहले उसकी पहचान वेरिफाई करें।
-अपने पर्सनल जानकारी जैसे कि बैंक डिटेल्स, पासवर्ड, आदि को किसी अनजान व्यक्ति के साथ शेयर न करें।
-अपने फोन और कंप्यूटर में सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर इंस्टाल करें।
-किसी भी बैंक या सरकारी वेबसाइट का उपयोग करने के लिए आफिशियल वेबसाइट का उपयोग करें।
-अनजान फोन या मैसेज से आने वाले लिंक को न खोलें।
-अगर आपको लगता है कि आपको डिजिटल अरेस्ट का शिकार बनाया जा रहा है, तो तुरंत पुलिस या बैंक को सूचित करें। |