Tobacco Tax Hike: 1 फरवरी से सिगरेट, तंबाकू और पान मसाला उत्पादों पर नया टैक्स ढांचा लागू होने जा रहा है। केंद्र सरकार मौजूदा GST के ऊपर अब अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी और हेल्थ सेस लगाने जा रही है। इसके साथ ही अभी जो ‘सिन गुड्स’ पर कंपनसेशन सेस (Compensation Cess) लगता है, उसे खत्म कर दिया जाएगा।
नए ढांचे के तहत तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लगेगी। वहीं पान मसाला पर हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस लगाया जाएगा। ये नए टैक्स मौजूदा GST से अलग होंगे।
1 फरवरी से लागू होगा 40% GST
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बीते साल दिसंबर में केंद्र सरकार ने एक नए कानून को मंजूरी दी थी। इसके तहत सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर टैक्स का नया ढांचा लागू किया जाएगा। इसके तहत इन उत्पादों पर अब 28 प्रतिशत की जगह 40 प्रतिशत GST लगाया जाएगा।
सरकारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, 1 फरवरी से पान मसाला, सिगरेट, तंबाकू और इसी तरह के अन्य उत्पादों पर 40 प्रतिशत GST लागू होगा। बीड़ी पर 18 प्रतिशत GST पहले की तरह ही लगाया जाएगा। यानी इसकी GST की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
हालांकि, इन GST दरों के ऊपर अब नए टैक्स अलग से लगाए जाएंगे। पान मसाला पर हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस लगेगा। वहीं, तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लागू होगी।
फिलहाल सिगरेट 53 प्रतिशत टैक्स
अभी भारत में सिगरेटों पर कुल टैक्स करीब 53 प्रतिशत के आसपास है। इसमें 28 प्रतिशत GST शामिल है, जबकि बाकी टैक्स मूल्य के आधार पर वसूला जाता है। यह टैक्स दर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिश से काफी कम मानी जाती है। WHO का कहना है कि धूम्रपान को हतोत्साहित करने के लिए सिगरेटों पर कम से कम 75 प्रतिशत टैक्स होना चाहिए।
अनुमानों के मुताबिक, भारत में इस समय करीब 10 करोड़ लोग धूम्रपान करते हैं। यही वजह है कि तंबाकू पर टैक्स बढ़ाने को सेहत से जुड़ी एक अहम नीति के तौर पर देखा जाता है।
पैकिंग मशीनों के लिए नए नियम भी लागू
वित्त मंत्रालय ने बुधवार को Chewing Tobacco, Jarda Scented Tobacco और Gutkha Packing Machines से जुड़े नए नियम भी अधिसूचित किए हैं। इन नियमों में च्युइंग टोबैको, जर्दा और गुटखा बनाने वाली पैकिंग मशीनों की उत्पादन क्षमता तय करने और उसी आधार पर ड्यूटी वसूलने का पूरा ढांचा तय किया गया है।
संसद की मंजूरी के बाद लिया गया फैसला
दिसंबर 2025 में संसद ने दो अहम विधेयकों को मंजूरी दी थी। इन्हीं विधेयकों के जरिए पान मसाला मैन्युफैक्चरिंग पर नया हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस और तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लगाने का रास्ता साफ हुआ था।
अब सरकार ने अधिसूचना जारी कर यह स्पष्ट कर दिया है कि ये नए टैक्स 1 फरवरी से लागू होंगे और उसी तारीख से मौजूदा GST कंपनसेशन सेस खत्म कर दिया जाएगा।
कैपेसिटी बेस्ड टैक्स सिस्टम क्यों लाया गया
सरकार ने एक्साइज ड्यूटी को लेकर यह भी स्पष्ट किया है कि Health and National Security Cess Bill, 2025 के तहत टैक्स सिस्टम को कैपेसिटी-बेस्ड बनाया जा रहा है। इसका मतलब यह है कि टैक्स अब उत्पादन की रिपोर्ट पर नहीं, बल्कि मशीन की इंस्टॉल्ड क्षमता के आधार पर तय होगा।
सरकार का कहना है कि इससे बिना बताए मशीन चलाने, आंशिक उत्पादन दिखाने और टैक्स चोरी जैसे मामलों पर लगाम लगेगी। साथ ही इससे बाजार में स्थिरता आएगी। केंद्र और राज्यों, दोनों के राजस्व की सुरक्षा होगी।
एक्साइज ड्यूटी कैलकुलेशन कैसे होगी
सेंट्रल एक्साइज एक्ट की धारा 3A के मुताबिक, निर्माता को एक्साइज ड्यूटी अपनी तय वार्षिक उत्पादन क्षमता के आधार पर चुकानी होगी। हालांकि, निर्माता की ओर से मिली जानकारी का सत्यापन करने में वक्त लगेगा।
तब तक ड्यूटी की गणना रिटेल सेल प्राइस और पैकिंग मशीन की अधिकतम स्पीड के आधार पर की जाएगी। इसमें देखा जाएगा कि मशीन प्रति मिनट कितने पाउच बना सकती है और उन पाउच की अधिकतम बिक्री कीमत क्या है।
उदाहरण से समझिए नया सिस्टम
अगर च्युइंग टोबैको बनाने वाली मशीन की अधिकतम क्षमता 500 पाउच प्रति मिनट है और पाउच की रिटेल सेल प्राइस (RSP) ₹2 है, तो प्रति मशीन प्रति महीने एक्साइज ड्यूटी ₹0.83 करोड़ होगी।
अगर उसी मशीन से ₹4 RSP वाले पाउच बनाए जाते हैं, तो ड्यूटी बढ़कर ₹1.52 करोड़ प्रति मशीन प्रति महीने हो जाएगी। इसमें ₹0.83 करोड़ या 0.38 गुणा RSP में से जो रकम ज्यादा होगी, वही लागू मानी जाएगी।
महीने के बीच उत्पादन शुरू करने पर भी पूरा टैक्स
सरकार ने नियम 13(3) के तहत यह भी साफ कर दिया है कि अगर कोई निर्माता 1 फरवरी के बाद रजिस्ट्रेशन कराता है, मशीनें लगाता है और मान लीजिए महीने की 10 तारीख से उत्पादन शुरू करता है, तब भी उसे उस पूरे महीने की एक्साइज ड्यूटी चुकानी होगी। यानी महीने के बीच उत्पादन शुरू करने पर टैक्स में कोई राहत नहीं मिलेगी।
टैक्स बढ़ने से कीमतों पर क्या असर होगा
कीमतों में बढ़ोतरी: 40% GST और उस पर अतिरिक्त ड्यूटी लगने से सिगरेट, च्युइंग टोबैको, गुटखा और पान मसाला की खुदरा कीमतें सीधे तौर पर बढ़ेंगी।
खरीद क्षमता घटेगी: लागत बढ़ने से ये उत्पाद कम किफायती हो जाएंगे। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य की रणनीति का हिस्सा है, ताकि खासकर युवाओं और कम आय वाले वर्गों में खपत कम की जा सके।
टैक्स का बोझ उपभोक्ताओं पर: बढ़े हुए टैक्स का बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा, क्योंकि कंपनियां यह अतिरिक्त लागत कीमतों के जरिए आगे बढ़ा देंगी।
टैक्स के पीछे सरकार का मकसद क्या है
सरकार का कहना है कि तंबाकू उत्पादों पर नए टैक्स का सबसे बड़ा मकसद लोगों की सेहत है। तंबाकू के इस्तेमाल को कम करना, उससे जुड़ी बीमारियों पर लगाम लगाना और स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं के लिए पैसा जुटाना इसका अहम उद्देश्य है।
साथ ही सरकार राजस्व बढ़ाने पर भी ध्यान दे रही है, क्योंकि ज्यादा टैक्स के बावजूद भारत में तंबाकू उत्पाद अभी भी सस्ते माने जाते हैं। एक वजह टैक्स सिस्टम को आसान और साफ बनाना भी है। ताकि एक्साइज, NCCD और कंपेंसेशन सेस जैसे अलग-अलग टैक्स को एक ही ढांचे में समेटा जा सके, भले ही इसके लिए कुछ नए टैक्स जोड़े जा रहे हों।
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