सांकेतिक तस्वीर
जागरण संवाददाता, भागलपुर। एक मृत महिला को कागजों में जिंदा दिखाकर फर्जी शपथपत्र के आधार पर जमीन का नामांतरण करा लिया गया। इस बड़े फर्जीवाड़े के उजागर होने के बाद सदर अनुमंडल पदाधिकारी विकास कुमार ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने का आदेश दिया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
पूरा मामला तब सामने आया जब आवेदक सैयद ऐनाम उद्दीन ने ठोस साक्ष्यों के साथ सदर एसडीओ को आवेदन सौंपा। दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया कि मृत रैयत को जीवित दिखाकर फर्जी एफिडेविट तैयार किया गया और उसी के आधार पर दाखिल-खारिज कराया गया। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीओ ने अपने कार्यालय की पंजी से अभिलेखों का मिलान कराया, जिसमें परत-दर-परत फर्जीवाड़ा उजागर हो गया।
जांच में सामने आया कि वैध रैयत हशमुन निशा की मृत्यु छह अप्रैल 2015 को हो चुकी है। जिसका नगर निगम द्वारा निर्गत मृत्यु प्रमाण पत्र भी मौजूद है। इसके बावजूद कार्यपालक दंडाधिकारी, सदर के नाम से शपथपत्र संख्या 3526, दिनांक 13 मई 2024 दिखाया गया, जिसमें हशमुन निशा को जीवित बताया गया, जबकि कार्यालय पंजी के मिलान में यह शपथपत्र किसी अन्य व्यक्ति अभयकांत आर्य के नाम से दर्ज पाया गया।
इस आधार पर दाखिल-खारिज वाद संख्या 1188/2024-25 को फर्जी करार दिया गया। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि मो. इस्लाम, पिता स्व. जलीस उद्दीन, निवासी गणीचक द्वारा किसी अन्य व्यक्ति के शपथपत्र में कूटरचना कर अवैध रूप से नामांतरण कराया गया है। इस मामले में शपथ पहचानकर्ता को भी नोटिस जारी किया गया था, लेकिन 29 दिसंबर की सुनवाई में द्वितीय पक्ष अनुपस्थित रहे। प्रथम पक्ष सुनवाई में उपस्थित हुए।
सुनवाई के बाद सदर एसडीओ विकास कुमार ने इसे गंभीर गैर-कानूनी कृत्य मानते हुए अपने न्यायालय में केस दर्ज किया और जगदीशपुर के अंचलाधिकारी व मोजाहिदपुर थाना अध्यक्ष को निर्देश दिया कि मो. इस्लाम सहित इस प्रकरण में संलिप्त सभी लोगों के खिलाफ जांच पड़ताल कर विधि सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। |